शारदीय नवरात्रि का आठवां दिन आज, मां महागौरी की पूजा का लाभ, महत्व और मंत्र
आज, 12 अक्टूबर 2024 को शारदीय नवरात्रि का आठवां दिन है, जिसे अष्टमी के रूप में जाना जाता है। इस दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है, जो नवदुर्गा का आठवां स्वरूप हैं। महागौरी को अत्यंत पवित्र, शांत और शुभ माना जाता है। देवी महागौरी भक्तों के सभी पापों का नाश करती हैं और जीवन में शांति, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।
मां महागौरी का स्वरूप और महत्व
मां महागौरी का रूप अत्यंत उज्ज्वल और श्वेत वर्ण का होता है। उनके चार हाथ होते हैं, जिनमें से दो हाथों में त्रिशूल और डमरू धारण करती हैं और दो हाथों से वर और अभय मुद्रा में आशीर्वाद देती हैं। महागौरी की पूजा से मनुष्य के सभी दुखों का नाश होता है और जीवन में शांति एवं खुशहाली आती है। कहा जाता है कि महागौरी के तप से उनके शरीर का रंग गौरी यानी अत्यंत गोरा हो गया, इसलिए उन्हें महागौरी कहा जाता है।
मां महागौरी की पूजा का लाभ
- विवाह और वैवाहिक जीवन में सुख: मां महागौरी की पूजा उन लोगों के लिए विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है, जिनकी विवाह संबंधी परेशानियां चल रही हों। इस दिन की पूजा से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
- सुख-समृद्धि और धन प्राप्ति: देवी महागौरी की कृपा से घर में सुख, समृद्धि और धन की वृद्धि होती है। भक्तों के सभी पापों का नाश होता है और जीवन में सकारात्मकता आती है।
- बीमारियों और संकटों से मुक्ति: जो लोग शारीरिक और मानसिक कष्टों से परेशान हैं, उन्हें महागौरी की आराधना से राहत मिलती है। देवी की कृपा से सभी संकट दूर होते हैं और आरोग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
मां महागौरी की पूजा विधि
- सबसे पहले स्नान कर साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें और मां महागौरी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीप प्रज्वलित करें।
- देवी को सफेद वस्त्र, सफेद फूल और नारियल अर्पित करें। मां को श्वेत वस्त्र और सफेद चंदन बहुत प्रिय हैं।
- उनके चरणों में दूध, दही, चीनी, घी और शहद अर्पित करें, जिसे पंचामृत कहा जाता है।
- मां महागौरी के बीज मंत्र का जाप करें और उनके सामने श्रद्धा पूर्वक आरती करें।
मां महागौरी का मंत्र
मां महागौरी की आराधना करते समय निम्नलिखित मंत्र का जाप करना अत्यंत लाभकारी होता है:
मंत्र:
“ॐ देवी महागौर्यै नमः”
इस मंत्र का 108 बार जाप करने से मां महागौरी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इसके साथ ही, मां की आराधना में सच्चे हृदय से ध्यान लगाना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
महागौरी की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, पार्वती जी ने भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। इस दौरान उनका शरीर काला पड़ गया था। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें स्वीकार किया और उनके शरीर को गंगाजल से धोया, जिससे वह अत्यंत गौर वर्ण की हो गईं। तभी से उन्हें महागौरी के नाम से पूजा जाता है।
