पीएम मोदी रूस रवाना, आज पुतिन से मिलेंगे: कल BRICS समिट में लेंगे हिस्सा; जिनपिंग से 2 साल बाद मुलाकात संभव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रूस के दौरे पर रवाना हो गए हैं, जहां उनकी मुलाकात रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से होगी। यह दौरा अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अहम माना जा रहा है, क्योंकि दोनों देशों के बीच रिश्तों पर पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों का गहरा असर पड़ा है। इसके अलावा, पीएम मोदी कल रूस में होने वाले BRICS समिट में भी हिस्सा लेंगे, जहां उन्हें चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से 2 साल बाद मुलाकात करने का मौका मिल सकता है।
पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच इस मुलाकात के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों पर विस्तृत चर्चा होगी। रूस और भारत के बीच लंबे समय से रणनीतिक और रक्षा संबंध रहे हैं, और इस बैठक में विभिन्न मुद्दों पर आपसी सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया जा सकता है। हालांकि, यूक्रेन युद्ध और रूस पर लगे पश्चिमी प्रतिबंधों के चलते रूस की वैश्विक स्थिति कमजोर हुई है, ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों देशों के बीच भविष्य की साझेदारी किस दिशा में जाती है।
कल पीएम मोदी रूस में BRICS (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) समिट में हिस्सा लेंगे। यह समिट वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और विकासशील देशों के हितों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित होगी। BRICS देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा, खासकर ऐसे समय में जब पश्चिमी देशों और अन्य महाशक्तियों के साथ भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है।
इस दौरे की सबसे बड़ी खासियत यह हो सकती है कि पीएम मोदी की मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से हो। दोनों नेताओं के बीच पिछले 2 साल से कोई द्विपक्षीय वार्ता नहीं हुई है। 2020 में लद्दाख के गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद से भारत और चीन के रिश्तों में तनाव बरकरार है। अगर मोदी और जिनपिंग के बीच मुलाकात होती है, तो यह एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है जिससे दोनों देशों के बीच संबंधों को सुधारने की दिशा में प्रगति हो सकती है।
इस दौरे के दौरान पीएम मोदी और पुतिन के बीच भारत-रूस संबंधों के अलावा क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों पर भी चर्चा होगी। यूक्रेन युद्ध, पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंध, और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती चीनी गतिविधियों जैसे मुद्दे इस बातचीत के प्रमुख बिंदु हो सकते हैं। भारत इन सभी मुद्दों में अपनी संतुलित नीति बनाए रखने का प्रयास करेगा, क्योंकि वह रूस और पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंधों को संतुलित रखना चाहता है।
