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दुनियाभर में नेताओं ने मनाई दिवाली: ब्रिटिश PM ने की आरती, व्हाइट हाउस में बजी ‘ओम जय जगदीश हरे’

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दुनियाभर में दिवाली का त्योहार बड़े धूमधाम से मनाया गया, और कई वैश्विक नेताओं ने इस पर्व को लेकर खास कार्यक्रम आयोजित किए। भारत के बाहर भी इस पर्व का उत्साह देखते ही बनता था, जहाँ ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने विशेष रूप से दिवाली मनाई।

ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने किया आरती में हिस्सा

ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, जो खुद हिंदू हैं, ने लंदन में दिवाली के अवसर पर आरती में भाग लिया। सुनक ने अपनी पत्नी अक्षता मूर्ति के साथ इस पूजा में शामिल होकर भारतीय समुदाय को शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि दिवाली का यह पर्व हमें अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का संदेश देता है और वैश्विक एकता और सामंजस्य का प्रतीक है। इस दौरान सुनक के साथ बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय के लोग उपस्थित रहे, जो इस अवसर पर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे थे।

व्हाइट हाउस में बजी ‘ओम जय जगदीश हरे’

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी व्हाइट हाउस में दिवाली के उपलक्ष्य में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें अमेरिकी मिलिट्री बैंड ने ‘ओम जय जगदीश हरे’ की धुन बजाई। इस अद्भुत प्रदर्शन ने वहां उपस्थित भारतीय समुदाय के लोगों को भावुक कर दिया। बाइडेन ने इस अवसर पर दिवाली के संदेश को साझा करते हुए कहा कि यह त्योहार प्रेम, समर्पण और आशा का प्रतीक है, और यह विविधता में एकता का भी उदाहरण है। व्हाइट हाउस में दीये जलाकर भारत-अमेरिका के सांस्कृतिक संबंधों को भी प्रकट किया गया।

अन्य देशों में भी दिवाली का उत्सव

कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, और सिंगापुर जैसे देशों में भी दिवाली को लेकर खास आयोजन किए गए। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने अपने आधिकारिक निवास पर दीप जलाए और भारतीय समुदाय को शुभकामनाएँ दीं। वहीं, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीस ने भी सिडनी में एक दिवाली कार्यक्रम में शिरकत की और इस पर्व के महत्त्व को रेखांकित किया।

विश्व स्तर पर भारतीय संस्कृति का प्रभाव

दुनिया के बड़े नेताओं द्वारा दिवाली का उत्सव मनाना भारतीय संस्कृति और परंपराओं का वैश्विक स्तर पर प्रभाव दर्शाता है। यह पर्व न केवल भारतीयों के लिए बल्कि विभिन्न देशों के नेताओं और वहां के नागरिकों के लिए भी एकता, शांति और प्रकाश का संदेश लेकर आता है।

इस बार दिवाली का यह जश्न दिखाता है कि भारतीय पर्व और परंपराएँ अब सीमाओं से परे जाकर वैश्विक परिदृश्य में अपनी पहचान बना रही हैं।