World

जस्टिन ट्रूडो के इस्तीफे की मांग, 4 दिन का अल्टीमेटम: कनाडा में PM के खिलाफ हुए 24 सांसद, कहा – रिजाइन नहीं तो करेंगे विद्रोह

Spread the love

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की सरकार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं, क्योंकि उनकी ही पार्टी के 24 सांसदों ने उनके इस्तीफे की मांग करते हुए 4 दिन का अल्टीमेटम दे दिया है। इन सांसदों का कहना है कि यदि ट्रूडो ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा नहीं दिया तो वे उनके खिलाफ विद्रोह करने के लिए तैयार हैं। ट्रूडो के खिलाफ यह असंतोष कई मुद्दों के कारण बढ़ा है, जिसमें हाल के विवादित निर्णय और कनाडा-भारत संबंधों में आए तनाव भी शामिल हैं। आइए जानते हैं इस मामले की पूरी जानकारी और इसके पीछे के कारणों को विस्तार से।


क्यों उठी जस्टिन ट्रूडो के इस्तीफे की मांग?

ट्रूडो सरकार पर कई विवादास्पद मुद्दों और घरेलू समस्याओं को हल करने में नाकामी के आरोप लग रहे हैं। इसके अलावा, भारत के साथ कूटनीतिक संबंधों में आई दरार ने कनाडा में ट्रूडो की छवि को और नुकसान पहुंचाया है। उनके नेतृत्व में उठाए गए कई फैसले, जैसे कि भारत पर खालिस्तानी आंदोलन को समर्थन देने के आरोप, देश के अंदर ही तीखी आलोचना का विषय बने हैं।

इसके चलते उनकी खुद की पार्टी के सांसदों में असंतोष बढ़ रहा है। इन सांसदों का कहना है कि ट्रूडो का नेतृत्व कमजोर हो चुका है और उनके पद पर बने रहने से पार्टी की छवि को नुकसान हो सकता है। इसलिए, पार्टी में अंदरूनी तौर पर एक बदलाव की आवश्यकता महसूस की जा रही है।


24 सांसदों का विद्रोह की चेतावनी: 4 दिन का अल्टीमेटम

इन 24 सांसदों ने जस्टिन ट्रूडो को चेतावनी दी है कि वे अगले चार दिनों के भीतर इस्तीफा दें, अन्यथा पार्टी में उनके खिलाफ विद्रोह की स्थिति पैदा हो जाएगी। यह विद्रोह संसद में उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने या पार्टी के अन्य सदस्यों के समर्थन के बिना उन्हें कमजोर करने के रूप में सामने आ सकता है।

इन सांसदों का कहना है कि वे ट्रूडो के विवादित फैसलों और अनिश्चितताओं के चलते देश में पार्टी की छवि को सुधारने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अगर ट्रूडो ने इस्तीफा नहीं दिया तो इन सांसदों के विद्रोह से सरकार का संकट और बढ़ सकता है।


भारत के साथ तनाव: संकट की बड़ी वजह

हाल ही में भारत और कनाडा के बीच खालिस्तान मुद्दे और खुफिया एजेंसियों के विवाद के चलते राजनयिक संबंधों में काफी तनाव आया है। भारत ने ट्रूडो सरकार पर खालिस्तानी समर्थकों को बढ़ावा देने के आरोप लगाए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक और कूटनीतिक संबंध कमजोर हो गए हैं।

ट्रूडो द्वारा भारत के खिलाफ दिए गए बयान से कनाडा के कई सांसदों को भी असहमति है। इन सांसदों का मानना है कि इस तरह की स्थिति से कनाडा की अंतरराष्ट्रीय छवि और अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंच सकता है, क्योंकि भारत के साथ व्यापारिक संबंध कनाडा के लिए महत्वपूर्ण हैं।


ट्रूडो की लोकप्रियता में गिरावट

लगातार विवादों और राजनैतिक अस्थिरता के कारण जस्टिन ट्रूडो की लोकप्रियता में भी कमी आई है। हाल ही में हुए सर्वे में कनाडा की जनता ने भी उनकी नीतियों और निर्णयों पर असंतोष जताया है। उनकी लोकप्रियता में आई गिरावट का प्रभाव उनकी लिबरल पार्टी के चुनावी भविष्य पर भी पड़ सकता है।

पार्टी के कई सदस्यों का कहना है कि यदि ट्रूडो ने इस्तीफा नहीं दिया तो आने वाले चुनावों में पार्टी को हार का सामना करना पड़ सकता है।