World

भारत-कनाडा ने एक-दूसरे के 6-6 डिप्लोमैट्स निकाले: भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने राजदूत को कनाडा से बुलाया, कहा- वहां उनकी सुरक्षा का भरोसा नहीं

Spread the love

भारत और कनाडा के बीच राजनयिक तनाव और गहरा हो गया है, जब दोनों देशों ने एक-दूसरे के 6-6 वरिष्ठ राजनयिकों को निष्कासित कर दिया। यह कदम दोनों देशों के बीच बढ़ते राजनीतिक और कूटनीतिक विवाद का परिणाम है। इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच भारत ने अपने उच्चायुक्त (राजदूत) को कनाडा से वापस बुला लिया है, यह कहते हुए कि वहां उनकी सुरक्षा का कोई भरोसा नहीं है।

कूटनीतिक विवाद की पृष्ठभूमि
भारत और कनाडा के बीच कूटनीतिक संबंधों में तनाव तब बढ़ा जब कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने हाल ही में भारतीय एजेंसियों पर कनाडा में खालिस्तान समर्थक नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया था। भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे बेबुनियाद और राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित बताया।

ट्रूडो द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद भारत और कनाडा के बीच राजनयिक संबंधों में कड़वाहट बढ़ गई। भारत ने कनाडा के इस कदम पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए पहले कनाडाई खालिस्तान समर्थक तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित करने का सिलसिला शुरू कर दिया।

6-6 डिप्लोमैट्स को निष्कासित किया गया
अक्टूबर 2024 में, कनाडा और भारत दोनों ने एक-दूसरे के 6-6 वरिष्ठ राजनयिकों को निष्कासित किया। कनाडा ने भारत के राजनयिकों को ओटावा से वापस भेजा, और इसी के जवाब में भारत ने कनाडा के डिप्लोमैट्स को नई दिल्ली से निष्कासित कर दिया। इस कदम से दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों में और गिरावट आई है।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने जताई सुरक्षा चिंताएँ
भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने उच्चायुक्त को कनाडा से वापस बुलाने का फैसला लिया, यह कहते हुए कि कनाडा में उनके राजनयिकों की सुरक्षा को लेकर उन्हें कोई भरोसा नहीं है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि हाल के घटनाक्रमों ने वहां भारतीय अधिकारियों और राजनयिक स्टाफ की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है।

कनाडा में खालिस्तान समर्थक तत्वों की बढ़ती गतिविधियों और भारत विरोधी प्रदर्शनों के कारण भारत ने पहले भी अपनी चिंता जाहिर की थी। इसके बावजूद, कनाडा की सरकार ने इन गतिविधियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिससे भारत और अधिक नाराज हो गया।

भारत-कनाडा संबंधों में बढ़ते तनाव
भारत और कनाडा के बीच यह तनाव पिछले कुछ समय से लगातार बढ़ रहा है। कनाडा में बड़ी संख्या में खालिस्तान समर्थक प्रवासी रहते हैं, जो वहां खुलकर अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। भारत ने कनाडा से कई बार इन तत्वों पर कार्रवाई करने की अपील की, लेकिन ओटावा ने इस मामले में स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी का हवाला देते हुए कोई विशेष कदम नहीं उठाया।

कनाडा में खालिस्तानी तत्वों के द्वारा भारत के राजनयिकों को निशाना बनाने की घटनाएँ भी बढ़ी हैं, जिससे भारत की सुरक्षा चिंताएँ और गहरी हो गई हैं। हाल ही में कनाडा में भारतीय वाणिज्य दूतावासों के बाहर भी भारत विरोधी प्रदर्शनों में बढ़ोतरी देखी गई थी।

राजनीतिक तनाव और संभावित परिणाम
दोनों देशों के बीच इस तरह की स्थिति से व्यापारिक और आर्थिक संबंधों पर भी असर पड़ सकता है। कनाडा और भारत के बीच व्यापार वार्ताओं को पहले ही निलंबित कर दिया गया था, और यह कूटनीतिक विवाद भविष्य में व्यापारिक संबंधों को और प्रभावित कर सकता है।

हालांकि दोनों देश इस तनावपूर्ण स्थिति को शांतिपूर्ण तरीके से हल करने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन फिलहाल ऐसा कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहा है। यह राजनयिक संकट लंबे समय तक जारी रह सकता है, क्योंकि दोनों देशों के राजनीतिक नेतृत्व अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं।