भारत-आसियान समिट में बोले मोदी – “21वीं सदी हमारी है”: कहा – “हम शांति प्रिय देश”; आज ईस्ट एशिया समिट में लेंगे हिस्सा, चीन-अमेरिका भी होंगे शामिल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में आयोजित भारत-आसियान (ASEAN) समिट में 21वीं सदी को एशिया का समय बताया और भारत की प्रमुख भूमिका पर जोर दिया। इस समिट के दौरान उन्होंने भारत के शांति और समृद्धि के प्रति प्रतिबद्धता की बात करते हुए कहा कि “भारत एक शांति प्रिय देश है और हम अपनी साझेदारी के जरिए विश्व में शांति और स्थिरता बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं।”
भारत और आसियान के मजबूत संबंध
प्रधानमंत्री मोदी ने आसियान देशों के साथ भारत के संबंधों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि 21वीं सदी एशिया की सदी होगी, और इसमें भारत और आसियान देशों की साझेदारी की प्रमुख भूमिका रहेगी। उन्होंने कहा, “हमारी साझेदारी न केवल आर्थिक विकास बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है।” मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ के तहत आसियान देशों के साथ संबंध मजबूत किए गए हैं और ये संबंध आगे भी विकसित होते रहेंगे।
ईस्ट एशिया समिट में भी लेंगे हिस्सा
आज पीएम मोदी ईस्ट एशिया समिट में भी हिस्सा लेंगे, जिसमें चीन और अमेरिका समेत कई अन्य बड़े देश शामिल होंगे। इस बैठक में क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की जाएगी, जिनमें इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा और शांति बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। चीन और अमेरिका के शामिल होने से इस समिट की अहमियत और भी बढ़ गई है, खासकर तब जब दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंध रहे हैं।
चीन-अमेरिका की मौजूदगी से बढ़ी दिलचस्पी
ईस्ट एशिया समिट में चीन और अमेरिका की भागीदारी ने इस बैठक को और भी महत्वपूर्ण बना दिया है। दोनों देशों के बीच चल रहे व्यापार और रणनीतिक तनाव के बीच इस बैठक में क्या चर्चा होती है, इस पर सभी की नजरें टिकी होंगी। भारत, जो एक संतुलनकारी शक्ति के रूप में उभर रहा है, की भूमिका इस समिट में अहम हो सकती है।
शांति और विकास का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की विदेश नीति के मुख्य सिद्धांतों पर जोर देते हुए कहा कि “भारत शांति और विकास में विश्वास करता है। हम सभी देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, चाहे वह आर्थिक विकास हो या सुरक्षा के मुद्दे।” उन्होंने इस समिट को वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका के एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा।
