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भारत का ऑटोमोबाइल एक्सपोर्ट 14% बढ़ा: अप्रैल से सितंबर के बीच भारतीय कंपनियों ने 25.28 लाख गाड़ियां विदेशी मार्केट में बेचीं

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भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग ने 2023 की पहली छमाही में शानदार प्रदर्शन करते हुए 14% की वृद्धि दर्ज की है। अप्रैल से सितंबर 2023 के बीच, भारतीय ऑटोमोबाइल कंपनियों ने कुल 25.28 लाख गाड़ियां विदेशी बाजारों में बेचीं। यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में काफी अधिक है और इस वृद्धि को वैश्विक मांग और भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मकता का परिणाम माना जा रहा है।

ऑटोमोबाइल एक्सपोर्ट में शानदार प्रदर्शन:

भारत के ऑटोमोबाइल उद्योग ने निर्यात के क्षेत्र में एक मजबूत पकड़ बनाई है। खासकर दोपहिया और यात्री वाहनों की मांग में भारी इज़ाफा देखा गया। भारतीय कंपनियां अपने किफायती और गुणवत्ता युक्त वाहनों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से अपना स्थान बना रही हैं।

प्रमुख एक्सपोर्ट मार्केट:

अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, और दक्षिण एशिया भारतीय ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए सबसे प्रमुख बाजार बने हुए हैं। इन क्षेत्रों में किफायती और टिकाऊ वाहनों की मांग बढ़ रही है, जिससे भारतीय वाहन निर्माताओं को बढ़त मिल रही है। इसके अलावा, यूरोप और उत्तरी अमेरिका के कुछ हिस्सों में भी भारतीय कंपनियों ने अपने बाजार को विस्तार दिया है।

कंपनियों की रणनीति और योगदान:

मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज ऑटो और टीवीएस मोटर्स जैसी प्रमुख भारतीय कंपनियों ने इस वृद्धि में अहम भूमिका निभाई है। इन कंपनियों ने अपने उत्पादों की गुणवत्ता और डिजाइन में सुधार करते हुए नई तकनीक और सुरक्षा मानकों को प्राथमिकता दी है, जिससे उनकी गाड़ियों की मांग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी है।

सरकारी नीतियों का समर्थन:

भारत सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल और निर्यात को प्रोत्साहन देने वाली नीतियों ने भी इस वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकार ने भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त दिलाने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें उत्पादन और निर्यात के लिए कर में छूट, नई तकनीकों का विकास और वैश्विक मानकों को अपनाना शामिल है।

भविष्य की संभावनाएं:

भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग की यह वृद्धि आने वाले समय में और भी बेहतर हो सकती है। इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग और स्वच्छ ऊर्जा के प्रति बढ़ती जागरूकता के साथ, भारतीय कंपनियां भी इस दिशा में अपने उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतारने के लिए तैयार हो रही हैं।

इस 14% की वृद्धि ने भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग को वैश्विक स्तर पर और मजबूत किया है, और आने वाले समय में यह उद्योग भारत की आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देना जारी रखेगा।