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Sleep Apnea: रात-रात भर नहीं आती नींद तो हो जाएं सावधान

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अगर आपको रात-रात भर नींद नहीं आती, तो इसे हल्के में लेना आपकी सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। स्लीप एपनिया (Sleep Apnea) एक ऐसी गंभीर स्थिति है जिसमें सोते समय व्यक्ति की सांस बार-बार रुक जाती है। यह समस्या न केवल नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करती है, बल्कि इससे दिल की बीमारियां, हाई ब्लड प्रेशर और यहां तक कि स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ सकता है।

क्या है स्लीप एपनिया?

स्लीप एपनिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें सोते वक्त श्वसन मार्ग अस्थायी रूप से अवरुद्ध हो जाता है, जिससे कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनट तक व्यक्ति की सांस रुक जाती है। यह स्थिति हर रात कई बार हो सकती है, जिसके कारण व्यक्ति को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और वह बार-बार जाग जाता है। इसे दो प्रमुख प्रकारों में बांटा जा सकता है:

  1. ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA): यह सबसे सामान्य प्रकार है, जहां श्वासनली का मांसपेशी ढीलापन श्वास को अवरुद्ध करता है।
  2. सेंट्रल स्लीप एपनिया (CSA): इस स्थिति में मस्तिष्क सांस लेने के लिए सही संकेत नहीं भेजता, जिससे सांस रुकने की समस्या उत्पन्न होती है।

स्लीप एपनिया के लक्षण:

  1. तेज खर्राटे लेना: स्लीप एपनिया का सबसे सामान्य लक्षण जोर से खर्राटे लेना है। यह तब होता है जब वायुमार्ग बंद हो जाता है और व्यक्ति को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती।
  2. रात में बार-बार जागना: स्लीप एपनिया के कारण व्यक्ति रात में बार-बार जाग जाता है और उसे महसूस होता है कि उसकी सांस रुक गई है।
  3. दिन में थकान और नींद आना: रात में अच्छी नींद न मिलने के कारण दिन में थकान महसूस होती है और कई बार बिना किसी कारण के भी नींद आ जाती है।
  4. सिरदर्द: सुबह उठने पर सिरदर्द रहना भी स्लीप एपनिया का एक संकेत हो सकता है, क्योंकि रात में पर्याप्त ऑक्सीजन न मिलने से यह समस्या होती है।
  5. कंसन्ट्रेशन की कमी: लगातार थकान और नींद पूरी न होने के कारण ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत हो सकती है।
  6. मूड स्विंग्स: स्लीप एपनिया से प्रभावित लोग अक्सर चिड़चिड़ेपन, डिप्रेशन, या मूड स्विंग्स का सामना कर सकते हैं।

स्लीप एपनिया के खतरे:

  1. हृदय संबंधी बीमारियां: स्लीप एपनिया के कारण व्यक्ति के हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर, अनियमित धड़कन और यहां तक कि हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ जाता है।
  2. स्ट्रोक का खतरा: जो लोग स्लीप एपनिया से पीड़ित होते हैं, उनमें स्ट्रोक का जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में काफी बढ़ जाता है।
  3. डायबिटीज: स्लीप एपनिया टाइप-2 डायबिटीज से भी जुड़ा हुआ है। खराब नींद से इंसुलिन की संवेदनशीलता कम हो जाती है, जिससे ब्लड शुगर का स्तर प्रभावित होता है।
  4. डिप्रेशन: लगातार थकान और नींद की कमी व्यक्ति को मानसिक रूप से भी प्रभावित कर सकती है, जिससे डिप्रेशन और चिंता का स्तर बढ़ सकता है।
  5. एक्सीडेंट का खतरा: दिन में नींद आने और ध्यान की कमी के कारण दुर्घटना का खतरा भी बढ़ जाता है, खासकर वाहन चलाते समय।

स्लीप एपनिया से कैसे बचा जा सकता है?

  1. वजन कम करें: अधिक वजन वाले लोगों में स्लीप एपनिया का खतरा अधिक होता है, इसलिए वजन नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है।
  2. स्लीपिंग पोजीशन बदलें: पीठ के बल सोने से श्वास मार्ग बंद हो सकता है, इसलिए करवट लेकर सोने की कोशिश करें।
  3. एल्कोहल और स्मोकिंग से बचें: ये दोनों चीजें श्वसन मार्ग की मांसपेशियों को प्रभावित करती हैं और स्लीप एपनिया का खतरा बढ़ाती हैं।
  4. सीपीएपी मशीन का इस्तेमाल: यदि स्लीप एपनिया गंभीर हो, तो डॉक्टर सीपीएपी (Continuous Positive Airway Pressure) मशीन का उपयोग करने की सलाह दे सकते हैं, जो श्वास मार्ग को खुला रखने में मदद करती है।
  5. मेडिकल ट्रीटमेंट: अगर स्लीप एपनिया का स्तर गंभीर हो, तो डॉक्टर सर्जरी या अन्य चिकित्सा उपचार का सुझाव दे सकते हैं।
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