शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित होता है। यह दिन विशेष रूप से साधना, संयम और तप का प्रतीक माना जाता है। देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से भक्तों को अपने जीवन में अटूट धैर्य, आत्म-नियंत्रण और लक्ष्य की प्राप्ति के लिए शक्ति प्राप्त होती है। माना जाता है कि इस दिन मां की आराधना करने से साधक को कठिन परिस्थितियों में भी सफलता और मानसिक शांति मिलती है।
मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप और महत्त्व
मां ब्रह्मचारिणी को तप की देवी कहा जाता है। उनका स्वरूप अत्यंत शांत और उज्जवल है। मां ब्रह्मचारिणी के एक हाथ में जप की माला और दूसरे में कमंडल धारण किए हुए हैं, जो उनके तपस्वी स्वरूप को दर्शाता है। वह भगवती पार्वती का वही स्वरूप हैं, जिन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था।
उनकी पूजा से भक्तों को आत्म-नियंत्रण, त्याग, और मानसिक बल मिलता है, जिससे वे जीवन के कठिन लक्ष्यों को भी प्राप्त करने में सक्षम होते हैं। साथ ही, मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से जीवन में सदैव सुख-शांति बनी रहती है और सभी कार्य सफल होते हैं।
नवरात्रि के दूसरे दिन का शुभ मुहूर्त (2024)
- पूजा का शुभ समय: सुबह 06:15 से 08:45 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:50 से 12:35 बजे तक
- गोधूलि वेला: शाम 06:00 से 06:30 बजे तक
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि
- कलश स्थापना: पहले दिन की तरह दूसरे दिन भी कलश के पास दीपक जलाकर मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करें।
- स्नान और वस्त्र: सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल पर पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें।
- ध्यान: मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान करें और उनके मंत्र का जाप करें।
- पूजा सामग्री: रोली, चावल, फूल, फल, धूप, दीप, गंगाजल, पंचामृत, चंदन आदि को एकत्र करें।
- पुष्प अर्पित करें: मां को सफेद रंग के फूल, विशेष रूप से चमेली या बेलपत्र अर्पित करें।
- नैवेद्य: मां ब्रह्मचारिणी को चीनी और पंचामृत का भोग लगाएं, क्योंकि यह उनका प्रिय भोजन है।
- आरती: पूजा के अंत में मां की आरती करें और “ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः” मंत्र का जाप करें।
मां ब्रह्मचारिणी की आरती
जय अंबे ब्रह्मचारिणी माता, जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।
ब्रह्मा जी के मन भाती हो, ज्ञान सभी को सिखलाती हो।
ब्रह्मरूपी तुम कहलाती, जो साधक ध्यान लगाता।
उसका तुम कल्याण करती, संकट से उद्धार करती।
जो भी तुमको ध्याता है, ब्रह्मलोक वह पाता है।
रिद्धि-सिद्धि परवान करती, जीवन में सुखमान करती।
मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से क्या प्राप्त होता है?
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा साधक को धैर्य और संयम का वरदान देती है। इस दिन की पूजा से व्यक्ति के जीवन में संकल्प शक्ति और साधना की शक्ति का विकास होता है। अगर आप किसी बड़े लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रयास कर रहे हैं, तो मां की उपासना आपको आत्मबल प्रदान करती है। उनकी आराधना से मानसिक शांति और जीवन में संतुलन बना रहता है।
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से साधक को अपने लक्ष्यों की प्राप्ति में सफलता मिलती है और जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना करने की शक्ति मिलती है। मां की कृपा से सभी कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

