सारकोमा कैंसर एक दुर्लभ और जानलेवा बीमारी है, जो शरीर के कनेक्टिव टिश्यूज़ (संयोजी ऊतक) जैसे हड्डियों, मांसपेशियों, नसों, वसा और रक्त वाहिकाओं में विकसित होती है। यह कैंसर अन्य कैंसर प्रकारों की तुलना में कम होता है, लेकिन इसका प्रभाव बहुत गंभीर हो सकता है। इसके निदान और उपचार में देरी होने पर यह तेजी से फैल सकता है और जानलेवा साबित हो सकता है। आइए जानते हैं इस कैंसर से जुड़ी जरूरी जानकारी और किन लोगों में इसका खतरा सबसे ज्यादा होता है।
सारकोमा कैंसर क्या है?
सारकोमा एक प्रकार का कैंसर है जो शरीर के संयोजी ऊतकों में उत्पन्न होता है। इसे मुख्य रूप से दो भागों में बांटा जा सकता है:
- ऑस्टियोसारकोमा (हड्डियों का कैंसर): यह हड्डियों में उत्पन्न होता है, खासकर पैरों और हाथों में।
- सॉफ्ट टिश्यू सारकोमा: यह शरीर के मांसपेशियों, फैट, नसों, रक्त वाहिकाओं, और अन्य सॉफ्ट टिश्यू में विकसित होता है।
सारकोमा कैंसर दुर्लभ है, लेकिन यह तेजी से शरीर के अन्य हिस्सों में फैल सकता है, जिससे इसका उपचार कठिन हो जाता है।
किन लोगों में सारकोमा कैंसर का खतरा ज्यादा होता है?
1. बच्चों और युवाओं में:
हालांकि कैंसर अधिकतर वृद्ध लोगों में देखा जाता है, लेकिन सारकोमा कैंसर बच्चों और युवाओं में ज्यादा पाया जाता है। खासतौर पर ऑस्टियोसारकोमा 10 से 20 साल की उम्र के बीच के बच्चों और किशोरों में ज्यादा देखा जाता है।
2. वंशानुगत कारणों से:
अगर आपके परिवार में किसी को सारकोमा या कोई अन्य कैंसर हुआ है, तो आपके सारकोमा होने का खतरा बढ़ सकता है। कुछ वंशानुगत बीमारियां, जैसे ली-फ्राउमिनी सिंड्रोम और न्यूरोफाइब्रोमेटोसिस, सारकोमा के खतरे को बढ़ाती हैं।
3. रेडिएशन थेरेपी का इतिहास:
जो लोग पहले किसी अन्य कैंसर के इलाज के लिए रेडिएशन थेरेपी ले चुके हैं, उनमें सारकोमा कैंसर विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है। रेडिएशन थेरेपी के बाद शरीर के संयोजी ऊतकों में बदलाव हो सकता है, जिससे सारकोमा उत्पन्न हो सकता है।
4. रसायनिक पदार्थों के संपर्क में आने वाले लोग:
जो लोग लंबे समय तक बेंजीन, आर्सेनिक, और हर्बिसाइड्स जैसे हानिकारक रसायनों के संपर्क में रहते हैं, उनमें सारकोमा का खतरा बढ़ सकता है। ये रसायन कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं और कैंसर के विकास को प्रेरित कर सकते हैं।
5. लिम्फेडेमा से पीड़ित लोग:
लिम्फेडेमा एक स्थिति है जिसमें लिम्फ वाहिकाएं ब्लॉक हो जाती हैं और शरीर में तरल पदार्थ जमा होने लगता है। लंबे समय तक लिम्फेडेमा की स्थिति रहने पर सॉफ्ट टिश्यू सारकोमा का खतरा बढ़ सकता है।
सारकोमा कैंसर के लक्षण:
सारकोमा के लक्षण शुरुआती चरणों में अक्सर स्पष्ट नहीं होते, लेकिन कुछ सामान्य लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं:
- शरीर के किसी हिस्से में गांठ या सूजन।
- प्रभावित क्षेत्र में दर्द, खासतौर पर अगर यह हड्डी या मांसपेशियों से जुड़ा हो।
- हड्डियों में कमजोरी या फ्रैक्चर।
- वजन में अचानक गिरावट।
- थकान और शरीर में कमजोरी महसूस करना।
सारकोमा कैंसर की जाँच और उपचार:
सारकोमा की पुष्टि के लिए बायोप्सी, MRI, CT स्कैन और PET स्कैन जैसी जाँच की जाती हैं। उपचार के तौर पर सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी, और कीमोथेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, इसका उपचार इस बात पर निर्भर करता है कि कैंसर कितनी तेजी से फैल रहा है और शरीर के किन हिस्सों में फैला हुआ है।

