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पैंक्रियाटिक कैंसर अवेयरनेस मंथ 2024: शुरुआती अवस्था में पता लगाना है मुश्किल, जानें इसके लक्षण और बचाव के तरीके

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नवंबर को पैंक्रियाटिक कैंसर अवेयरनेस मंथ के रूप में मनाया जाता है, ताकि इस घातक बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके। पैंक्रियाज (अग्न्याशय) में होने वाला यह कैंसर शुरुआती चरणों में पहचान में नहीं आता, जिससे इसके उपचार में भी कठिनाई होती है। पैंक्रियाटिक कैंसर का सही समय पर पता लगाना बहुत जरूरी है, क्योंकि यह कैंसर तेजी से फैलता है और अक्सर तब पहचान में आता है जब यह गंभीर अवस्था में पहुंच चुका होता है।

पैंक्रियाटिक कैंसर के सामान्य लक्षण

पैंक्रियाटिक कैंसर का प्रारंभिक चरण में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होता, लेकिन कुछ संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये लक्षण हो सकते हैं:

  1. पेट में दर्द – पैंक्रियाटिक कैंसर में अक्सर पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द रहता है, जो पीठ तक भी जा सकता है।
  2. भूख में कमी और वजन में अचानक गिरावट – अचानक वजन कम होना और भूख का खत्म हो जाना एक गंभीर संकेत है।
  3. त्वचा और आंखों का पीला पड़ना – पैंक्रियाटिक कैंसर के कारण पीलिया (जॉन्डिस) हो सकता है।
  4. गहरे रंग का मूत्र और हल्के रंग का मल – जिगर से संबंधित लक्षण भी पैंक्रियाटिक कैंसर के संकेत हो सकते हैं।
  5. थकान और कमजोरी – कैंसर के बढ़ने से शरीर में कमजोरी महसूस होती है।
  6. मितली और उल्टी – यह लक्षण कैंसर के कारण पाचन तंत्र में परेशानी का संकेत हो सकता है।

पैंक्रियाटिक कैंसर का पता लगाना क्यों है मुश्किल?

पैंक्रियाज शरीर के अंदर गहराई में स्थित होता है, जिससे शुरुआती स्टेज में ट्यूमर का पता लगाना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा, इसके लक्षण भी अन्य सामान्य बीमारियों से मिलते-जुलते हैं, जिससे इसकी पहचान में देर हो जाती है।

पैंक्रियाटिक कैंसर का जोखिम किसे अधिक है?

कुछ कारक पैंक्रियाटिक कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं, जैसे:

बचाव के उपाय

  1. स्वस्थ आहार: फल, सब्जियां, साबुत अनाज और कम वसा वाले प्रोटीन को आहार में शामिल करें।
  2. धूम्रपान से बचें: तंबाकू उत्पादों का सेवन पूरी तरह बंद करें।
  3. शारीरिक गतिविधि: नियमित व्यायाम करें, जो स्वस्थ वजन बनाए रखने में मदद करता है।
  4. शराब से दूरी: शराब का सेवन सीमित करें, जिससे लीवर और पैंक्रियाज को स्वस्थ रखा जा सके।

जागरूकता ही बचाव का पहला कदम

पैंक्रियाटिक कैंसर अवेयरनेस मंथ के माध्यम से इसका उद्देश्य यही है कि लोग इस कैंसर के शुरुआती लक्षणों को पहचान सकें और अपने डॉक्टर से समय पर परामर्श लें। जागरूकता से ही इस खतरनाक बीमारी से बचाव संभव है।

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