Site icon The Daily Gazette

अहोई अष्टमी 2024 की शुभकामनाएं: प्रियजनों को भेजें शुभ संदेश, संतान की खुशहाली और लंबी उम्र की करें कामना

अहोई अष्टमी 2024

अहोई अष्टमी 2024

Spread the love

अहोई अष्टमी का पर्व हर साल कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। यह पर्व माताओं द्वारा अपनी संतान की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना के लिए मनाया जाता है। इस दिन माताएं निर्जला व्रत रखकर देवी अहोई की पूजा करती हैं और शाम को तारों के दर्शन के बाद अपना व्रत खोलती हैं। इस शुभ अवसर पर अपने प्रियजनों को अहोई अष्टमी की शुभकामनाएं भेजना एक खास परंपरा बन गई है।

अहोई अष्टमी की महत्ता:

अहोई अष्टमी का व्रत खासतौर पर उन माताओं के लिए महत्वपूर्ण होता है जो अपने बच्चों की खुशहाल और लंबी उम्र की कामना करती हैं। इस दिन अहोई माता की पूजा की जाती है और उन्हें दूध, फल और अन्य पूजा सामग्री अर्पित की जाती है। माना जाता है कि अहोई माता का आशीर्वाद मिलने से संतान दीर्घायु और स्वस्थ रहती है।

प्रियजनों को भेजें ये शुभकामनाएं:

  1. “अहोई अष्टमी के पावन अवसर पर माता अहोई का आशीर्वाद आपकी संतान पर सदैव बना रहे। आपकी संतान को लंबी उम्र, खुशहाली और सफलता मिले। अहोई अष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं!”
  2. “संतान की खुशहाली और दीर्घायु की कामना के साथ, अहोई अष्टमी की शुभकामनाएं। माता अहोई का आशीर्वाद सदैव आपके घर पर बना रहे।”
  3. “अहोई अष्टमी का यह पावन पर्व आपके परिवार में सुख-शांति और समृद्धि लाए। आपकी संतान सदा स्वस्थ और खुशहाल रहे। शुभ अहोई अष्टमी!”
  4. “माँ अहोई के आशीर्वाद से आपकी संतान को लंबी उम्र और खुशियों का वरदान मिले। अहोई अष्टमी का पर्व आपके जीवन में खुशियों की बहार लाए।”
  5. “आपकी संतान हमेशा खुश रहे, सफलता की ऊंचाइयों को छुए और माता अहोई का आशीर्वाद सदैव उसके साथ रहे। आपको और आपके परिवार को अहोई अष्टमी की ढेर सारी शुभकामनाएं!”

अहोई अष्टमी पर पूजा विधि:

इस दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले स्नान कर के निर्जला व्रत शुरू करती हैं और पूरे दिन बिना अन्न या जल ग्रहण किए देवी अहोई की पूजा करती हैं। शाम के समय तारों की पूजा के बाद व्रत खोला जाता है। इस पूजा में अहोई माता की तस्वीर या प्रतीक बनाकर उनकी पूजा की जाती है। चांदी की अहोई माता की मूरत का भी उपयोग किया जा सकता है।

माता अहोई का आशीर्वाद:

माना जाता है कि अहोई अष्टमी का व्रत करने से संतान की दीर्घायु, स्वास्थ्य और समृद्धि सुनिश्चित होती है। यह पर्व माताओं के लिए उनके बच्चों के प्रति अपने निस्वार्थ प्रेम और आशीर्वाद का प्रतीक है। संतान सुख की कामना करने वाली महिलाओं के लिए यह व्रत विशेष महत्व रखता है।

Exit mobile version