Chhathi Maiya: कौन हैं छठी मैया, और क्यों होती है छठ पर्व में पूजा, जानिए पूरी कहानी
छठ पर्व भारत के सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र त्योहारों में से एक है, जिसे विशेष रूप से उत्तर भारत, बिहार, झारखंड, और उत्तर प्रदेश में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। छठ पूजा सूर्य देव और उनकी बहन छठी मैया को समर्पित है। इस व्रत को महिलाएं और पुरुष दोनों समान श्रद्धा के साथ रखते हैं। छठी मैया को संतान सुख, परिवार की समृद्धि और स्वास्थ्य की देवी माना जाता है, और उनकी पूजा से सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं।
कौन हैं छठी मैया?
छठी मैया को हिंदू धर्म में षष्ठी देवी के नाम से जाना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, वे सूर्य देव की बहन मानी जाती हैं और प्रकृति की देवी होने के साथ-साथ संतान रक्षा, संतान प्राप्ति और उनकी लंबी उम्र की देवी भी मानी जाती हैं। पुराणों में उन्हें जीवन और संतान सुख की देवी के रूप में भी पूजनीय माना गया है। उनकी पूजा करने से संतान सुख और परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
छठ पर्व में छठी मैया की पूजा का महत्व
छठ पर्व में सूर्य देव और छठी मैया की पूजा एक विशेष अनुष्ठान के साथ की जाती है। इस पूजा का मुख्य उद्देश्य सूर्य देव की ऊर्जा से जीवन और शक्ति का संचार करना है, और छठी मैया से संतान और परिवार की रक्षा का आशीर्वाद प्राप्त करना है। व्रत करने वाले लोग पूरी श्रद्धा के साथ नदी, तालाब, या अन्य जलाशयों में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं और छठी मैया की आराधना करते हैं।
छठ पूजा की कहानी
छठ पूजा से जुड़ी एक पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत काल में कुंती ने पांडवों को वापस पाने के लिए और उनकी लंबी आयु के लिए छठ का व्रत किया था। इसके अलावा, राजा प्रियव्रत और रानी मालिनी की संतानहीनता के दुख को दूर करने के लिए छठी मैया ने आशीर्वाद दिया और उन्हें संतान प्राप्ति हुई। इससे छठी मैया की महिमा का पता चलता है और तब से यह व्रत संतान की प्राप्ति और उसकी रक्षा के लिए मनाया जाता है।
छठ पूजा के अनुष्ठान
- नहाय-खाय: छठ व्रत के पहले दिन व्रती पवित्रता से नहाते हैं और सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं।
- खरना: दूसरे दिन व्रती निर्जला उपवास करते हैं और शाम को प्रसाद बनाकर सूर्य देव और छठी मैया को अर्पित करते हैं।
- संध्या अर्घ्य: तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। यह बहुत ही महत्वपूर्ण अनुष्ठान होता है।
- उषा अर्घ्य: चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है, जिससे व्रत पूरा होता है।
छठ पर्व का वैज्ञानिक महत्व
छठ पूजा सूर्य की आराधना पर केंद्रित है, जो स्वास्थ्य और जीवन शक्ति का प्रमुख स्रोत है। सूर्य की किरणों में अल्ट्रावायलेट और अन्य ऊर्जा होती हैं, जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी मानी जाती हैं। यह पर्व पर्यावरण और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का भी एक अवसर है।
