कनाडा ने स्टूडेंट वीजा प्रोग्राम समाप्त किया: भारतीय छात्रों को बड़ा झटका
“कनाडा सरकार ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए बनाए गए लोकप्रिय स्टूडेंट डायरेक्ट स्ट्रीम (SDS) योजना को समाप्त करने का निर्णय लिया है। यह फैसला उन छात्रों के लिए एक बड़ा झटका है जो उच्च शिक्षा के लिए कनाडा जाने की योजना बना रहे थे। खासकर भारत सहित 14 देशों के छात्र इस फैसले से प्रभावित होंगे, क्योंकि इन देशों के छात्र बड़ी संख्या में इस योजना के तहत आवेदन करते थे”
स्टूडेंट डायरेक्ट स्ट्रीम (SDS)
SDS योजना एक त्वरित वीजा प्रक्रिया थी, जो उन अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए शुरू की गई थी जो कनाडा में उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते थे। इस योजना के तहत छात्रों को वीजा आवेदन में तेजी से मंजूरी मिलती थी और डॉक्यूमेंटेशन की प्रक्रिया भी सरल थी। भारत, पाकिस्तान, फिलीपींस, वियतनाम जैसे 14 देशों के छात्र इस योजना का लाभ उठा रहे थे।
योजना समाप्त करने का कारण
कनाडा सरकार ने इस योजना को समाप्त करने का कारण “आवेदन प्रक्रिया को समान बनाने” और “सभी छात्रों के लिए समान अवसर प्रदान करने” को बताया है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कनाडा में बढ़ती जनसंख्या, आवास की कमी और संसाधनों पर बढ़ते दबाव का बड़ा योगदान है।
भारतीय छात्रों पर असर
भारत कनाडा के लिए अंतरराष्ट्रीय छात्रों का सबसे बड़ा स्रोत देश है। हर साल हजारों भारतीय छात्र कनाडा में उच्च शिक्षा के लिए जाते हैं, और इनमें से अधिकांश SDS योजना के तहत आवेदन करते थे। इस योजना के बंद होने से न केवल वीजा प्रक्रिया धीमी होगी, बल्कि छात्रों को अतिरिक्त खर्च और डॉक्यूमेंटेशन के लिए भी तैयार रहना होगा।
छात्रों के लिए चुनौतियां
- धीमी वीजा प्रक्रिया: अब छात्रों को वीजा के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
- अतिरिक्त डॉक्यूमेंटेशन: आवेदन प्रक्रिया पहले से अधिक जटिल और समय लेने वाली हो जाएगी।
- वित्तीय बोझ: छात्रों को अतिरिक्त बैंक स्टेटमेंट्स और फंड्स दिखाने की आवश्यकता हो सकती है।
- सुविधा में कमी: SDS योजना ने प्रक्रिया को सरल बना दिया था, लेकिन अब छात्रों को अधिक जटिल प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ेगा।
क्या विकल्प हैं?
जो छात्र कनाडा में पढ़ाई करना चाहते हैं, उनके लिए अन्य विकल्प भी मौजूद हैं। वे नियमित स्टडी वीजा के तहत आवेदन कर सकते हैं, हालांकि इसके लिए अधिक तैयारी और समय की आवश्यकता होगी। इसके अलावा, छात्रों को अब अन्य देशों, जैसे ऑस्ट्रेलिया, यूके, और जर्मनी में शिक्षा के विकल्पों पर भी विचार करना होगा।
