12 नवंबर को तुलसी विवाह: चार महीने के विश्राम के बाद जागेंगे भगवान विष्णु, घर में सुख-समृद्धि के लिए तुलसी के पास जलाएं दीपक
हिंदू परंपरा के अनुसार, देवउठनी एकादशी (कार्तिक शुक्ल एकादशी) के दिन भगवान विष्णु चार महीने के योग निद्रा से जागते हैं। इस दिन का विशेष महत्व है, क्योंकि इसे तुलसी विवाह के रूप में भी मनाया जाता है। तुलसी विवाह का आयोजन घर में सुख, समृद्धि, और सौभाग्य की कामना से किया जाता है। इस वर्ष तुलसी विवाह 12 नवंबर को है।
तुलसी विवाह का महत्व
तुलसी विवाह का पर्व विष्णु और माता तुलसी के पवित्र मिलन का प्रतीक है। इस दिन घरों में तुलसी के पौधे को दुल्हन की तरह सजाया जाता है और श्रीहरि विष्णु के रूप में शालिग्राम से उनका विवाह कराया जाता है। मान्यता है कि तुलसी विवाह करने से सभी प्रकार के दोष समाप्त होते हैं और घर में शांति और समृद्धि का वास होता है।
कैसे करें तुलसी विवाह?
- तुलसी को सजाएं: तुलसी के पौधे को पूजा की सामग्री से सजाएं और चारों ओर रंगोली बनाएं।
- शाम को दीपक जलाएं: तुलसी के पास दीपक जलाना शुभ माना जाता है, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- विष्णु मंत्रों का जाप करें: भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें और तुलसी को भगवान शालिग्राम के साथ विवाह रूप में स्थापित करें।
- फूलों और फल चढ़ाएं: तुलसी विवाह के समय फूल, फल, और मिठाई चढ़ाएं और प्रसाद बांटें।
धार्मिक मान्यता और लाभ
तुलसी विवाह से भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है और यह विवाह संबंधी समस्याओं का भी निवारण करता है। इस दिन का व्रत और पूजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है और घर में सुख-शांति का वास होता है।
