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अलक्ष्मी: देवी लक्ष्मी की बड़ी बहन, दीपावली की रात घर के बाहर दीप जलाने की परंपरा और जन्म कथा

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दीपावली का पर्व न केवल लक्ष्मी पूजन का अवसर होता है, बल्कि इस दिन उनकी बड़ी बहन अलक्ष्मी का भी एक खास महत्व है। अलक्ष्मी को “ज्येष्ठा देवी” के नाम से भी जाना जाता है और उन्हें दरिद्रता और अशुभता की देवी माना जाता है। दीपावली की रात घर के बाहर दीप जलाकर उन्हें विदा करने की परंपरा है, ताकि घर में लक्ष्मी का वास हो और अशुभता दूर रहे। आइए जानते हैं अलक्ष्मी के जन्म की कथा और उनके महत्व के बारे में विस्तार से।

अलक्ष्मी का जन्म और उनके चरित्र की कथा

अलक्ष्मी का जन्म समुद्र मंथन के दौरान हुआ था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब देवताओं और असुरों ने अमृत की प्राप्ति के लिए समुद्र मंथन किया, तो समुद्र से कई वस्तुएं और देवता निकले। इन्हीं में से एक थीं देवी लक्ष्मी, जो सुंदरता, धन और सुख-समृद्धि की प्रतीक मानी जाती हैं। उसी समय अलक्ष्मी का भी जन्म हुआ, लेकिन उनका स्वरूप लक्ष्मी के विपरीत था। उन्हें दरिद्रता, कलह, और दुर्भाग्य का प्रतीक माना गया।

अलक्ष्मी का स्वरूप कठोर, काला और क्रोध से भरा बताया गया है। जहां लक्ष्मी का वास होता है, वहां समृद्धि और शांति रहती है, वहीं अलक्ष्मी का वास विपत्ति और संकट का कारण बनता है।

दीपावली पर अलक्ष्मी को घर से बाहर विदा करने की परंपरा

दीपावली की रात को, जब देवी लक्ष्मी का स्वागत होता है, तो परंपरागत रूप से घर के बाहर दीप जलाकर अलक्ष्मी को विदा किया जाता है। माना जाता है कि घर के बाहर दीप जलाने से दरिद्रता और अशुभता घर में प्रवेश नहीं करती, और देवी लक्ष्मी का वास घर के अंदर होता है। कई स्थानों पर अलक्ष्मी को धान, मिर्च, और नमक जैसे सामान के साथ बाहर भेजा जाता है ताकि समृद्धि और सुख-शांति बनी रहे।

अलक्ष्मी पूजन और उनका महत्व

हालांकि अलक्ष्मी का पूजा के रूप में स्वागत नहीं होता, परंतु उन्हें विदा करने की परंपरा जरूर निभाई जाती है। ऐसी मान्यता है कि अगर दीपावली के दिन अलक्ष्मी को विदा किया जाए तो घर में दरिद्रता का वास नहीं होता, और सुख-शांति की स्थापना होती है। इसलिए दीपावली की रात घर के बाहर विशेष रूप से एक दीपक जलाया जाता है, जो इस बात का प्रतीक है कि दरिद्रता और संकट घर के भीतर न आएं।

अलक्ष्मी के प्रतीक और लोक मान्यताएं

अलक्ष्मी को दरिद्रता का प्रतीक माना गया है, लेकिन उनके बिना लक्ष्मी की महिमा भी अधूरी मानी जाती है। भारतीय समाज में अलक्ष्मी के प्रतीक के रूप में कई लोक मान्यताएं प्रचलित हैं, जैसे कि घर में गंदगी, झगड़े और आर्थिक कठिनाइयाँ अलक्ष्मी का प्रभाव माना जाता है। यही कारण है कि दीपावली से पहले पूरे घर की सफाई और साज-सज्जा की जाती है, ताकि अलक्ष्मी का प्रभाव खत्म हो और देवी लक्ष्मी का स्वागत किया जा सके।