फेफड़ों के लिए खतरनाक हैं पटाखे: धुएं और केमिकल से गंभीर बीमारियों का जोखिम, डॉक्टर दे रहे हैं बचाव के उपाय
दिवाली के दौरान पटाखों से निकलने वाला धुआं और रसायन न केवल पर्यावरण बल्कि हमारी सेहत के लिए भी बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। खासकर फेफड़ों के लिए पटाखों का धुआं गंभीर समस्याएं उत्पन्न कर सकता है। डॉक्टरों के अनुसार, पटाखों से निकलने वाले हानिकारक कण और रसायन अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और यहां तक कि फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं। इस कारण डॉक्टर सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
पटाखों से फेफड़ों पर असर
पटाखों में इस्तेमाल होने वाले रसायन, जैसे कि सल्फर, बेरियम, और नाइट्रेट्स, जलने पर धुएं में तब्दील हो जाते हैं, जो सांस के साथ शरीर में पहुंचकर फेफड़ों को क्षति पहुंचाते हैं। छोटे कण फेफड़ों में गहराई तक पहुंचकर ऑक्सीजन के प्रवाह को बाधित कर सकते हैं। बच्चों, बुजुर्गों और उन लोगों के लिए जो पहले से ही सांस की बीमारियों से पीड़ित हैं, यह धुआं विशेष रूप से खतरनाक होता है।
डॉक्टरों के सुझाव: पटाखों के धुएं से बचने के तरीके
- घर के अंदर रहें: दिवाली के दौरान जितना संभव हो, घर के अंदर ही रहें और खिड़कियां-दरवाजे बंद रखें, ताकि बाहर का धुआं घर के अंदर न आ सके।
- N95 मास्क का उपयोग करें: यदि बाहर जाना जरूरी हो, तो N95 मास्क पहनें। यह मास्क छोटे हानिकारक कणों को फिल्टर करने में मदद करता है।
- नेबुलाइजर और इनहेलर रखें तैयार: जिन लोगों को अस्थमा या सांस की तकलीफ है, वे अपने नेबुलाइजर और इनहेलर को साथ रखें ताकि सांस लेने में कोई दिक्कत होने पर तुरंत राहत मिल सके।
- हर्बल और इको-फ्रेंडली पटाखों का विकल्प: अगर पटाखे जलाना जरूरी हो, तो हर्बल या इको-फ्रेंडली पटाखों का इस्तेमाल करें, जो कम प्रदूषण फैलाते हैं।
- भाप लें: दिवाली के बाद, भाप लेने से फेफड़ों को साफ रखने में मदद मिलती है, और गले में किसी भी प्रकार की जलन से राहत मिल सकती है।
प्रदूषण का स्तर और स्वास्थ्य पर प्रभाव
पटाखों के कारण दिवाली के समय हवा में प्रदूषक कणों का स्तर तेजी से बढ़ता है, जिससे सांस संबंधी बीमारियों के मामलों में अचानक वृद्धि देखी जाती है। डॉक्टरों का कहना है कि हमें पटाखों का उपयोग कम करने पर जोर देना चाहिए ताकि न केवल हमारे स्वास्थ्य बल्कि पर्यावरण को भी बचाया जा सके।
इस दिवाली, धुएं और प्रदूषण से दूर रहकर सुरक्षित और स्वस्थ त्योहार मनाएं।
