देश में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) की मांग तेजी से बढ़ रही है, और पिछले 6 महीनों में इनकी बिक्री में 25% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस अवधि में कुल 8 लाख इलेक्ट्रिक वाहन बिके, जिसमें सबसे अधिक योगदान दोपहिया और तिपहिया वाहनों का रहा। हालांकि, ई-कारों की बिक्री में अपेक्षाकृत कम वृद्धि देखने को मिली, जो केवल 1.3% रही।
दोपहिया और तिपहिया वाहनों की बढ़ी मांग
इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों की बढ़ती लोकप्रियता ने इस वृद्धि को गति दी है। ई-स्कूटर और ई-रिक्शा जैसे छोटे वाहनों की मांग में उल्लेखनीय उछाल देखा गया, जो आम जनता के बीच सस्ती और सुलभ परिवहन के रूप में उभरे हैं। कम परिचालन लागत और सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी ने भी इनकी बिक्री में बढ़ोतरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
ई-कारों की धीमी वृद्धि
दूसरी ओर, इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में मामूली बढ़ोतरी देखी गई। पिछले 6 महीनों में ई-कारों की बिक्री में केवल 1.3% की वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ई-कारों की उच्च कीमत, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, और लंबी चार्जिंग समय जैसी चुनौतियां इस सेगमेंट की धीमी वृद्धि के पीछे के प्रमुख कारण हैं।
सरकार की नीतियों का योगदान
इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की बिक्री में इस उछाल का एक बड़ा श्रेय सरकार की प्रोत्साहन योजनाओं और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने वाली नीतियों को जाता है। सरकार ने FAME II (Faster Adoption and Manufacturing of Hybrid and Electric Vehicles) योजना के तहत सब्सिडी और टैक्स में रियायतें देकर इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को प्रोत्साहित किया है। इसके साथ ही, कई राज्य सरकारें भी अपनी ओर से EVs को बढ़ावा देने के लिए टैक्स में छूट और सब्सिडी की पेशकश कर रही हैं।
भविष्य की संभावनाएं
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सालों में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग और भी तेज हो सकती है, खासकर जब बैटरी टेक्नोलॉजी में सुधार होगा और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार होगा। कंपनियां भी नए और सस्ते इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में उतारने की तैयारी कर रही हैं, जिससे आम लोगों के लिए इन्हें खरीदना और आसान हो जाएगा।
