शिमला: हिमाचल प्रदेश में वामपंथी दलों ने इजराइल के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि वह इजराइल को हथियार बेचने में संलग्न है, जो कि मानवाधिकारों के उल्लंघन का एक हिस्सा है। वामपंथी कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर नारेबाजी की और सरकार से इस मुद्दे पर जवाब मांगा।
प्रदर्शन का उद्देश्य:
प्रदर्शनकारियों ने इजराइल की कार्रवाईयों के खिलाफ विरोध जताते हुए कहा कि देश को मानवाधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की इजराइल के प्रति नीति चिंताजनक है और इससे भारतीय जनता के मूल्यों और सिद्धांतों का उल्लंघन हो रहा है।
वामपंथी दलों की मांगें:
प्रदर्शन के दौरान वामपंथी दलों ने निम्नलिखित मांगें उठाई:
- इजराइल के खिलाफ ठोस कदम: इजराइल के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई की जाए, ताकि मानवाधिकारों का सम्मान हो सके।
- हथियार व्यापार का बंद: मोदी सरकार इजराइल को हथियार बेचने की नीति पर पुनर्विचार करे और इस व्यापार को बंद करे।
- शांति की अपील: विश्व स्तर पर शांति बनाए रखने के लिए भारत एक सक्रिय भूमिका निभाए और संघर्ष में शामिल देशों के बीच संवाद को बढ़ावा दे।
प्रदर्शन का असर:
प्रदर्शन ने स्थानीय प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है और कुछ राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे पर विचार करने का आश्वासन दिया है। वामपंथी दलों का मानना है कि इस तरह के विरोध प्रदर्शन से लोगों में जागरूकता बढ़ेगी और उन्हें अपनी आवाज उठाने का मौका मिलेगा।
भविष्य की संभावनाएं:
यदि सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार नहीं करती है, तो वामपंथी दलों ने भविष्य में और बड़े पैमाने पर आंदोलन करने की योजना बनाई है। यह देखा जाना बाकी है कि मोदी सरकार इस मुद्दे पर किस प्रकार की प्रतिक्रिया देती है और क्या वामपंथी दलों की मांगें पूरी होती हैं।
