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सोने के लिए नींद की गोली लेते हैं आप? जान लीजिए ऐसा करना कितना खतरनाक

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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में नींद की समस्या आम हो गई है, और बहुत से लोग जल्दी सोने के लिए नींद की गोलियों का सहारा लेते हैं। हालांकि, अगर आप भी नियमित रूप से नींद की गोलियों का इस्तेमाल करते हैं, तो यह आदत आपके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि नींद की गोलियों का अत्यधिक और लंबे समय तक इस्तेमाल गंभीर शारीरिक और मानसिक बीमारियों को जन्म दे सकता है।

नींद की गोलियों का काम कैसे होता है?

नींद की गोलियों में सिडेटिव्स (शांत करने वाले तत्व) होते हैं, जो दिमाग की गतिविधियों को धीमा करके आपको नींद दिलाने में मदद करते हैं। ये गोलियां केवल कुछ समय के लिए राहत देती हैं, लेकिन इनके लगातार सेवन से शरीर को इन पर निर्भरता हो जाती है, जिससे व्यक्ति को बिना गोलियों के नींद आना मुश्किल हो जाता है।

नींद की गोलियों के खतरनाक दुष्प्रभाव

  1. आदत लगना: नियमित रूप से नींद की गोलियों का सेवन करने से शरीर को उनकी आदत हो जाती है। इसका मतलब यह है कि कुछ समय बाद वही मात्रा काम नहीं करती और व्यक्ति को ज्यादा गोलियां लेने की जरूरत पड़ने लगती है, जिससे नशे की लत जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
  2. मेमोरी लॉस: नींद की गोलियों का दीर्घकालिक उपयोग मेमोरी लॉस (याददाश्त खोने) का कारण बन सकता है। खासकर बुजुर्गों में ये गोलियां भूलने की बीमारी (डिमेंशिया) को बढ़ावा देती हैं।
  3. मानसिक स्वास्थ्य पर असर: नींद की गोलियों का लगातार इस्तेमाल मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। इससे डिप्रेशन, चिंता, और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
  4. सांस लेने में दिक्कत: कुछ लोगों में नींद की गोलियां सांस लेने में रुकावट पैदा कर सकती हैं, खासकर जो पहले से ही अस्थमा या अन्य सांस से संबंधित समस्याओं से जूझ रहे होते हैं।
  5. अचानक मृत्यु का खतरा: कई शोधों में यह पाया गया है कि नियमित रूप से नींद की गोलियों का सेवन करने वाले लोगों में असमय मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है। यह खतरा हृदय रोगों, श्वसन तंत्र की समस्याओं और दुर्घटनाओं के कारण बढ़ता है।

नींद की गोलियों का वैकल्पिक उपाय

नींद की गोलियों पर निर्भरता से बचने के लिए प्राकृतिक और स्वस्थ तरीकों का उपयोग किया जा सकता है:

  1. नियमित दिनचर्या बनाएं: सोने और जागने का एक निश्चित समय निर्धारित करें और उसका पालन करें।
  2. रिलैक्सेशन तकनीक: मेडिटेशन, डीप ब्रीदिंग और योग जैसी रिलैक्सेशन तकनीकें नींद लाने में मदद कर सकती हैं।
  3. कैफीन से बचें: सोने से पहले कैफीन युक्त पेय जैसे चाय, कॉफी या कोल्ड ड्रिंक से बचें, क्योंकि ये नींद को प्रभावित करते हैं।
  4. स्क्रीन टाइम कम करें: सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल, टीवी, और लैपटॉप का इस्तेमाल बंद कर दें। इनसे निकलने वाली ब्लू लाइट नींद में बाधा डाल सकती है।
  5. संतुलित आहार: हल्का और संतुलित आहार लें। सोने से पहले भारी भोजन से बचें, जिससे पाचन तंत्र पर अधिक दबाव न पड़े और नींद बेहतर आए।

डॉक्टर की सलाह कब लें?

अगर आप लंबे समय से नींद की समस्या का सामना कर रहे हैं और घरेलू उपायों से कोई राहत नहीं मिल रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहद जरूरी है। डॉक्टर आपकी समस्या की जड़ का पता लगाकर उचित उपचार का सुझाव देंगे, जो आपकी नींद की गुणवत्ता को बेहतर बना सकता है।

नींद की गोलियों का अत्यधिक और अनियमित उपयोग आपके स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। बेहतर है कि आप प्राकृतिक और स्वस्थ तरीकों से अपनी नींद की समस्या का समाधान करें।