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दिल्ली में बढ़ता वायु प्रदूषण: रोज 10 सिगरेट के बराबर है सांस लेना, ब्रेन स्ट्रोक और अन्य बीमारियों का खतरा; AQI से जानें आपका एक्सपोजर

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दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति दिन पर दिन बिगड़ती जा रही है। हालात इतने गंभीर हैं कि यहां सांस लेना भी मानो रोजाना 10 सिगरेट पीने के बराबर हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्तर का प्रदूषण न केवल श्वसन तंत्र बल्कि दिल और दिमाग पर भी गहरा असर डाल सकता है। इतना ही नहीं, इसके कारण ब्रेन स्ट्रोक, हृदय रोग और फेफड़ों के कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।

AQI और आपके स्वास्थ्य पर असर

दिल्ली और इसके आसपास के क्षेत्रों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लगातार खतरनाक स्तर पर बना हुआ है। AQI का स्तर जब 300 से ऊपर हो जाता है, तो इसे “बेहद खराब” श्रेणी में माना जाता है। यदि AQI 400 पार कर जाता है, तो इसे “गंभीर” श्रेणी में गिना जाता है, जिसका स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्तर का प्रदूषण रोजाना कुछ सिगरेट पीने के बराबर होता है।

ब्रेन स्ट्रोक का बढ़ता खतरा

प्रदूषित हवा में मौजूद पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे छोटे कण फेफड़ों के माध्यम से खून में घुलकर दिल और दिमाग को प्रभावित करते हैं। शोध में पाया गया है कि लंबे समय तक ऐसे प्रदूषण के संपर्क में रहने से ब्रेन स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। खासकर बुजुर्गों और बच्चों में इसका असर ज्यादा होता है।

सरकार और नागरिकों के लिए आवश्यक कदम

दिल्ली सरकार ने प्रदूषण से निपटने के लिए कई उपाय किए हैं, लेकिन वर्तमान स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि अतिरिक्त सख्त कदम उठाए जाने चाहिए। इसके अलावा नागरिकों को भी मास्क पहनने, घर के अंदर एयर प्यूरीफायर का उपयोग करने और अत्यधिक प्रदूषण वाले दिनों में बाहरी गतिविधियों से बचने की सलाह दी जाती है।

प्रदूषण से बचाव के सुझाव

  1. मास्क का प्रयोग: बाहर निकलते समय N95 मास्क पहनें।
  2. एयर प्यूरीफायर का उपयोग: घर और ऑफिस में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें।
  3. आहार में बदलाव: एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर भोजन करें, जो शरीर को प्रदूषण से होने वाले नुकसान से बचा सके।
  4. पौधारोपण: घर के आसपास अधिक पौधे लगाएं, जो हवा की गुणवत्ता सुधारने में मदद कर सकते हैं।

दिल्लीवासियों के लिए यह समय अपनी सेहत के प्रति अधिक जागरूक होने का है। जागरूकता और बचाव के उपाय अपनाकर हम प्रदूषण के दुष्प्रभावों को कम कर सकते हैं।