बॉलीवुड अभिनेता विक्रांत मैसी ने हाल ही में टेलीविजन कलाकारों के प्रति फिल्म इंडस्ट्री के दृष्टिकोण पर अपनी राय व्यक्त की। विक्रांत ने कहा कि कई बड़े बॉलीवुड सितारे सालों से टेलीविजन पर ‘सुपरस्टार’ बनकर चिपके हुए हैं, लेकिन जब वही टीवी कलाकार फिल्मों में काम मांगते हैं, तो उन्हें नजरअंदाज किया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें कई बार फिल्म इंडस्ट्री के कुछ लोगों से यह सुनने को मिला कि वे केवल फिल्म अभिनेता ही काम करते हैं, और टेलीविजन एक्टर के साथ काम करने में रुचि नहीं रखते।
टेलीविजन और फिल्म इंडस्ट्री के बीच भेदभाव
विक्रांत मैसी ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में एक विशेष मानसिकता काम करती है, जहां टीवी एक्टर को अक्सर कमतर माना जाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि टेलीविजन से जुड़े लोग जब फिल्मों में काम मांगने जाते हैं, तो उन्हें यह कहा जाता है कि ‘हम टीवी एक्टर के साथ काम नहीं करते।’ इस प्रकार के भेदभाव से वह काफी निराश हैं, क्योंकि टेलीविजन पर काम करने वाले कलाकार भी उतने ही प्रतिभाशाली होते हैं जितने कि फिल्म इंडस्ट्री के अभिनेता।
टीवी और फिल्म इंडस्ट्री के बीच बदलता समीकरण
विक्रांत का कहना है कि हालांकि, हाल के वर्षों में यह भेदभाव कुछ हद तक कम हुआ है और कई टीवी अभिनेताओं ने फिल्मों में अपने अभिनय से खुद को साबित भी किया है। विक्रांत ने खुद भी टेलीविजन से अपने करियर की शुरुआत की थी और फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा। उनका मानना है कि टेलीविजन और फिल्म दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वाले कलाकारों की मेहनत और समर्पण समान होते हैं, और दोनों का योगदान समान रूप से सम्मानित किया जाना चाहिए।
विक्रांत का करियर और संघर्ष
विक्रांत मैसी ने टेलीविजन पर ‘धारावी बैंक’ और ‘बालिका वधू’ जैसी शो से शुरुआत की थी, लेकिन वे अपनी फिल्मों में भी अपनी बेहतरीन एक्टिंग के लिए जाने जाते हैं। “दिल धड़कने दो,” “लव आज कल,” “छपाक,” और “हसीन दिलरुबा” जैसी फिल्मों में उनके शानदार अभिनय को दर्शकों ने सराहा। विक्रांत ने इस मुद्दे पर जोर दिया कि उन्हें टेलीविजन से फिल्म इंडस्ट्री में आने के बाद भी कई बार संघर्षों का सामना करना पड़ा था, और कई बार उन्हें यही भेदभाव महसूस हुआ था।
