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रूस ने गूगल पर लगाया ग्लोबल GDP का 620 गुना जुर्माना: यूट्यूब चैनल बंद करने पर कोर्ट ने ठोका बड़ा फाइन, रूस में गूगल दिवालिया घोषित

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रूस और गूगल के बीच संबंधों में तनाव अब चरम पर पहुँच गया है। हाल ही में रूस की एक अदालत ने गूगल पर एक भारी-भरकम जुर्माना लगाया, जो कि ग्लोबल GDP का 620 गुना है। यह कार्रवाई यूट्यूब चैनल बंद करने के मामले में की गई, जिसमें रूसी अधिकारियों ने गूगल पर मनमानी और रूसी कानूनों की अवहेलना का आरोप लगाया था।

क्या है मामला?

रूस का यह जुर्माना गूगल के उस निर्णय के कारण है, जिसमें उसने रूस समर्थित कई यूट्यूब चैनल्स को बंद कर दिया था। रूसी अधिकारियों का कहना है कि ये चैनल उनकी सरकारी नीतियों और विचारों को दर्शाते हैं। चैनल बंद करने से रूस में नाराजगी फैल गई, क्योंकि इसे सरकारी नीतियों के खिलाफ एक तरह का दमन और सेंसरशिप माना गया।

कोर्ट का फैसला और जुर्माना

रूसी कोर्ट ने इसे एक अवैध कार्रवाई मानते हुए गूगल पर भारी जुर्माना ठोकने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह कहा कि गूगल ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया और रूसी नागरिकों को जानकारी पाने के अधिकार से वंचित किया। कोर्ट ने गूगल पर ऐसा जुर्माना लगाया है जो वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 620 गुना के बराबर है, जो एक ऐतिहासिक और असाधारण जुर्माना है।

गूगल की दिवालियापन स्थिति

इस मामले के बाद रूस ने गूगल को देश में दिवालिया भी घोषित कर दिया है। रूस में गूगल पर पहले से ही कई प्रतिबंध लागू थे और सरकार की ओर से कड़े नियंत्रण रखे जा रहे थे। गूगल के कई वित्तीय और प्रशासनिक कार्य भी अब बंद कर दिए गए हैं, जिससे कंपनी को रूस में अपना व्यवसाय जारी रखना लगभग असंभव हो गया है।

यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया पर भी असर

रूस की सरकार सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर नियंत्रण रखने के लिए सख्त कदम उठा रही है। गूगल के बाद अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी रूस की निगरानी बढ़ सकती है। यूट्यूब पर रूस में लगाई गई पाबंदियों के बाद, देश में रूस की अपनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को बढ़ावा दिया जा सकता है।

रूस-गूगल विवाद का अंतरराष्ट्रीय प्रभाव

रूस द्वारा गूगल पर इतनी बड़ी रकम का जुर्माना लगाना और उसे दिवालिया घोषित करना वैश्विक स्तर पर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए एक चेतावनी के समान है। इससे यह संदेश जाता है कि सरकारें सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफार्मों पर अपनी संप्रभुता बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठा सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम भविष्य में अन्य देशों में भी डिजिटल प्लेटफार्मों पर स्थानीय नियंत्रण और प्रतिबंधों को प्रभावित कर सकता है।

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