Site icon The Daily Gazette

बच्चों के लिए जरूरी दादा-दादी, नाना-नानी: जानें क्यों बच्चों की परवरिश में ग्रैंडपेरेंट्स का होना अहम—साइकोलॉजिस्ट की राय

Spread the love

बच्चों की परवरिश में माता-पिता की भूमिका तो अहम होती ही है, लेकिन दादा-दादी और नाना-नानी की उपस्थिति भी बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। परिवार के ये वरिष्ठ सदस्य न केवल बच्चों को भावनात्मक समर्थन देते हैं, बल्कि उनके मानसिक और सामाजिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान करते हैं। साइकोलॉजिस्ट के अनुसार, ग्रैंडपेरेंट्स बच्चों की परवरिश में एक खास भूमिका निभाते हैं, जिससे बच्चे न केवल खुश रहते हैं बल्कि वे सामाजिक और नैतिक मूल्यों को भी गहराई से समझते हैं।

ग्रैंडपेरेंट्स का बच्चों की परवरिश में महत्व

1. भावनात्मक सुरक्षा का स्रोत

ग्रैंडपेरेंट्स बच्चों के लिए भावनात्मक सुरक्षा का एक मजबूत आधार होते हैं। जब बच्चे किसी बात से परेशान होते हैं या असुरक्षित महसूस करते हैं, तो दादा-दादी या नाना-नानी उन्हें सांत्वना और समझदारी भरा समर्थन देते हैं। साइकोलॉजिस्ट बताते हैं कि बच्चों में यह भावनात्मक सुरक्षा उनके आत्मविश्वास और मानसिक स्थिरता को बढ़ाती है।

2. अनुभव से मिलने वाली शिक्षा

ग्रैंडपेरेंट्स का जीवन अनुभव बच्चों के लिए एक अनमोल धरोहर होता है। वे अपने अनुभवों और ज्ञान से बच्चों को जीवन के कई महत्वपूर्ण सबक सिखाते हैं, जो किताबों या स्कूल में नहीं मिल सकते। उनकी कहानियां और संस्मरण बच्चों में धैर्य, संघर्ष और सफलता के महत्व को समझने में मदद करते हैं।

3. संस्कृति और परंपराओं की शिक्षा

ग्रैंडपेरेंट्स परिवार की संस्कृति और परंपराओं के जीवित उदाहरण होते हैं। वे बच्चों को पारिवारिक रीति-रिवाज, धार्मिक मान्यताओं और नैतिक मूल्यों से परिचित कराते हैं, जिससे बच्चे अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं। इससे बच्चों में अपनी संस्कृति के प्रति गर्व की भावना विकसित होती है।

4. धैर्य और सहनशीलता सिखाते हैं

साइकोलॉजिस्ट का मानना है कि ग्रैंडपेरेंट्स बच्चों को धैर्य, सहनशीलता और जीवन की छोटी-छोटी खुशियों को महत्व देना सिखाते हैं। उनके पास समय होता है बच्चों की बातें सुनने और उनके सवालों के जवाब देने का, जो माता-पिता की व्यस्त दिनचर्या में अक्सर संभव नहीं हो पाता।

5. मूल्यों और नैतिकता का विकास

ग्रैंडपेरेंट्स अपने अनुभवों से बच्चों को सही और गलत के बीच का अंतर समझाते हैं। वे जीवन के नैतिक मूल्यों जैसे ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा, और सहिष्णुता को बच्चों के जीवन में उतारने का प्रयास करते हैं। इस प्रकार, ग्रैंडपेरेंट्स बच्चों के नैतिक विकास में अहम भूमिका निभाते हैं।

6. माता-पिता के लिए मददगार

ग्रैंडपेरेंट्स न केवल बच्चों के लिए बल्कि माता-पिता के लिए भी एक मजबूत सहारा होते हैं। वे माता-पिता को उनकी जिम्मेदारियों से कुछ समय के लिए मुक्त कर सकते हैं और बच्चों की देखभाल में मदद करते हैं, जिससे माता-पिता के मानसिक तनाव में भी कमी आती है।

7. सकारात्मक सामाजिक विकास

ग्रैंडपेरेंट्स बच्चों को सामाजिक संबंधों और मानवीय संवेदनाओं का महत्व सिखाते हैं। उनके साथ समय बिताने से बच्चों में सहानुभूति, करुणा और दूसरों के प्रति सम्मान जैसी भावनाएं विकसित होती हैं।

साइकोलॉजिस्ट के अनुसार ग्रैंडपेरेंट्स के साथ बच्चों का समय बिताना क्यों जरूरी है?

साइकोलॉजिस्ट के अनुसार, ग्रैंडपेरेंट्स और बच्चों के बीच का संबंध बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक फायदेमंद होता है। इस संबंध से बच्चों में तनाव कम होता है और वे अपने भावनात्मक विकास के लिए बेहतर साधन प्राप्त करते हैं। ग्रैंडपेरेंट्स के साथ बिताया गया समय बच्चों में जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में मदद करता है।

साइकोलॉजिस्ट द्वारा सुझाए गए टिप्स:

Exit mobile version