Site icon The Daily Gazette

‘मुसलमानों को धमकाया जा रहा…’, AIMIM महाराष्ट्र चीफ ‘चलो मुंबई तिरंगा रैली’ निकाली

Spread the love

महाराष्ट्र में AIMIM (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) के प्रमुख इम्तियाज जलील ने हाल ही में एक बड़ी रैली का आयोजन किया, जिसका नाम ‘चलो मुंबई तिरंगा रैली’ रखा गया। इस रैली का उद्देश्य मुसलमानों के साथ हो रहे कथित भेदभाव और धमकियों के खिलाफ आवाज उठाना था। इम्तियाज जलील ने कहा कि मुसलमानों को देश में डराने और धमकाने की कोशिश की जा रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इम्तियाज जलील का बयान

रैली के दौरान, इम्तियाज जलील ने कहा, “मुसलमानों को लगातार धमकाया जा रहा है और उनके अधिकारों को कुचला जा रहा है। यह रैली उनके समर्थन में है, ताकि उन्हें यह महसूस हो कि वे अकेले नहीं हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि मुसलमान इस देश के सम्मानित नागरिक हैं और उन्हें अपनी धार्मिक और सामाजिक स्वतंत्रता का पूरा अधिकार है।

जलील ने अपने भाषण में जोर देकर कहा कि मुसलमानों को निशाना बनाना बंद होना चाहिए। “हम यहां सिर्फ अपने अधिकारों की मांग करने आए हैं, न कि किसी को धमकाने। इस रैली का उद्देश्य सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना और सभी धर्मों के लोगों के बीच एकता का संदेश देना है।”

‘तिरंगा रैली’ का मकसद

‘चलो मुंबई तिरंगा रैली’ का मुख्य उद्देश्य था कि मुसलमान समुदाय के लोग अपनी राष्ट्रीयता और देशप्रेम को दर्शाएं और यह संदेश दें कि वे भारतीय समाज का अभिन्न हिस्सा हैं। रैली में भाग लेने वाले हजारों लोगों ने अपने हाथों में तिरंगा थामे हुए देशभक्ति के नारों के साथ रैली को सफल बनाया।

जलील ने कहा, “तिरंगा हमारे लिए गर्व का प्रतीक है, और इस रैली के माध्यम से हम दिखाना चाहते हैं कि मुसलमान भी देश के प्रति पूरी तरह से वफादार हैं।”

राजनीतिक संदेश

इस रैली को सिर्फ मुसलमानों के हक की बात करने के लिए ही नहीं, बल्कि एक मजबूत राजनीतिक संदेश देने के रूप में भी देखा जा रहा है। महाराष्ट्र में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए AIMIM इस रैली के जरिए राज्य में अपने राजनीतिक आधार को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

रैली पर प्रतिक्रिया

रैली के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में कई प्रतिक्रियाएं आईं। कुछ नेताओं ने रैली की सराहना की, जबकि कुछ ने इसे सांप्रदायिक राजनीति का हिस्सा बताया। हालांकि, जलील ने स्पष्ट किया कि यह रैली किसी भी तरह की सांप्रदायिकता को बढ़ावा नहीं देती, बल्कि सभी समुदायों के लोगों के अधिकारों की बात करती है।

Exit mobile version