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मुश्किलों में फंसी दिलजीत दोसांझ की फिल्म पंजाब 95: सेंसर बोर्ड ने 120 कट लगाने और कई सीन में बदलाव के दिए आदेश, टाइटल भी करना होगा चेंज

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दिलजीत दोसांझ की आगामी फिल्म “पंजाब 95” सेंसर बोर्ड की सख्ती के चलते मुश्किलों में घिर गई है। सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म पर 120 कट लगाने के निर्देश दिए हैं और कई महत्वपूर्ण दृश्यों में बदलाव की मांग की है। इसके साथ ही फिल्म का टाइटल बदलने का भी आदेश दिया गया है। यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित है, जिन्होंने 1990 के दशक में पंजाब में हुए मानवाधिकार उल्लंघनों को उजागर किया था।

सेंसर बोर्ड की आपत्तियां

फिल्म पंजाब 95 को लेकर सेंसर बोर्ड ने कई गंभीर आपत्तियां जताई हैं। बोर्ड का कहना है कि फिल्म के कई सीन्स और संवाद ऐसे हैं, जो राजनीतिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील हो सकते हैं। इन सीन्स में बदलाव की मांग की गई है, ताकि फिल्म किसी प्रकार के विवाद से बच सके।

120 कट्स: सेंसर बोर्ड ने फिल्म में कुल 120 कट्स लगाने का निर्देश दिया है। इनमें से कई दृश्य और संवाद ऐसे हैं, जिनमें सीधे तौर पर 1990 के दशक के पंजाब की राजनीति और पुलिस कार्रवाई से जुड़े संदर्भ हैं।

टाइटल बदलने की मांग: सेंसर बोर्ड ने फिल्म के टाइटल “पंजाब 95” को भी बदलने का आदेश दिया है। बोर्ड का मानना है कि इस टाइटल से पंजाब के एक कठिन और संवेदनशील दौर की यादें ताजा हो सकती हैं, जो वर्तमान माहौल में विवाद पैदा कर सकता है।

फिल्म की कहानी और विवाद

पंजाब 95 जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित है, जो एक सामाजिक कार्यकर्ता और मानवाधिकार रक्षक थे। उन्होंने पंजाब पुलिस द्वारा किए गए कथित फर्जी मुठभेड़ों और लोगों के गायब होने जैसे मामलों को उजागर किया था। खालरा ने 1990 के दशक में सिखों के मानवाधिकारों के हनन को लेकर आवाज उठाई थी, जिसके कारण उन्हें 1995 में अगवा कर मार दिया गया। फिल्म का प्लॉट उनके संघर्ष और मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर उनकी लड़ाई पर केंद्रित है।

दिलजीत दोसांझ की प्रतिक्रिया

फिल्म के लीड अभिनेता दिलजीत दोसांझ, जो खुद एक पंजाबी आइकन माने जाते हैं, ने सेंसर बोर्ड के इस निर्णय पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन फिल्म से जुड़े सूत्रों का कहना है कि फिल्म की टीम इस मसले को लेकर निराश है। उनका मानना है कि यह फिल्म एक महत्वपूर्ण संदेश देती है और इसे दर्शकों तक बिना किसी कट के पहुंचना चाहिए।

प्रोड्यूसर और डायरेक्टर का पक्ष

फिल्म के निर्माता और निर्देशक का कहना है कि फिल्म बनाने का उद्देश्य सिर्फ एक ऐतिहासिक घटना को दर्शाना था, न कि किसी विवाद को जन्म देना। वे सेंसर बोर्ड के साथ मिलकर इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि फिल्म को बड़े पैमाने पर दर्शकों के सामने पेश किया जा सके।

क्या होगा आगे?

फिलहाल, यह देखना होगा कि फिल्म निर्माता सेंसर बोर्ड के निर्देशों का पालन कर फिल्म में संशोधन करेंगे या फिर वे फिल्म प्रमाणन अपीलीय न्यायाधिकरण (FCAT) या अन्य कानूनी रास्ते का सहारा लेंगे। अगर फिल्म में बदलाव किए जाते हैं, तो इसकी रिलीज डेट भी आगे बढ़ाई जा सकती है।