अमेरिका में आगामी राष्ट्रपति चुनाव से पहले भारतीय राजनीतिक गलियारों में यह सवाल चर्चा का विषय है कि भारत के लिए बेहतर साथी कौन होगा – पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प या वर्तमान उपराष्ट्रपति कमला हैरिस। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिकी संसद में हाल ही में की गई कमला हैरिस की प्रशंसा और ट्रम्प के साथ उनके पुराने “गुड फ्रेंड” संबंधों ने इस बहस को और तेज कर दिया है।
मोदी का ट्रम्प के साथ रिश्ता: ‘गुड फ्रेंड’
प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड ट्रम्प के बीच का रिश्ता लंबे समय से मजबूत रहा है। 2019 में ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम से लेकर 2020 में अहमदाबाद में हुए ‘नमस्ते ट्रम्प’ इवेंट तक, दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक मंच पर एक दूसरे के प्रति मित्रवत संबंध दिखाई दिए। ट्रम्प ने अपने कार्यकाल के दौरान भारत के साथ रक्षा और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया।
मोदी ने कई मौकों पर ट्रम्प को अपना “गुड फ्रेंड” कहा, जिससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध और प्रगाढ़ हुए। रक्षा सौदे, जैसे कि अपाचे और चिनूक हेलीकॉप्टर की डील, और भारत-अमेरिका व्यापार समझौतों में ट्रम्प प्रशासन की भारत के प्रति उदारता ने दोनों देशों के रिश्तों को एक नई ऊंचाई पर पहुँचाया।
कमला हैरिस: भारतीय विरासत और प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ
जब जो बाइडन ने 2020 में कमला हैरिस को उपराष्ट्रपति उम्मीदवार घोषित किया, तो यह भारत में गर्व की बात थी। कमला हैरिस की भारतीय जड़ें और उनका भारतीय मूल की पहली उपराष्ट्रपति बनना भारत-अमेरिका के सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने वाला क्षण साबित हुआ।
प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी संसद में कमला हैरिस की खुले दिल से तारीफ की थी। उन्होंने कहा था, “कमला हैरिस की इस ऊंचे पद तक पहुंचना सभी भारतीयों के लिए गर्व की बात है। उनकी सफलता भारतीय डायस्पोरा की सफलता की मिसाल है।” मोदी की यह टिप्पणी यह दर्शाती है कि भारत कमला हैरिस के साथ भी सकारात्मक और मजबूत संबंध बनाए रखना चाहता है।
भारत के लिए कौन बेहतर?
भारत के हित में यह देखना महत्वपूर्ण है कि कौन सा नेता भारत के साथ गहरे आर्थिक, रक्षा और सामरिक सहयोग को और प्रगाढ़ कर सकता है।
- ट्रम्प:
- ट्रम्प की “अमेरिका फर्स्ट” नीति के बावजूद उन्होंने भारत के साथ रक्षा और व्यापार संबंधों को प्राथमिकता दी। पाकिस्तान पर दबाव और चीन के साथ उनकी तीखी रणनीति भारत के लिए फायदेमंद रही।
- मोदी और ट्रम्प की निजी केमिस्ट्री ने दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत किया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि ट्रम्प प्रशासन भारत के लिए सकारात्मक था।
- कमला हैरिस:
- कमला हैरिस की भारतीय जड़ें और डेमोक्रेटिक पार्टी की मानवाधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों पर जोर देने वाली नीति भारत के साथ सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंधों को और गहरा कर सकती है।
- हालांकि, बाइडन प्रशासन के दौरान मानवाधिकार और कश्मीर मुद्दों पर अमेरिकी नीतियों ने भारत पर दबाव बढ़ाया है, लेकिन समग्र रूप से दोनों देशों के बीच सहयोग जारी रहा है।
भारत की प्राथमिकता क्या होनी चाहिए?
भारत को यह देखना होगा कि अमेरिकी नेतृत्व किस प्रकार चीन, पाकिस्तान और दक्षिण एशिया में भारत की सुरक्षा चिंताओं को समझता है। ट्रम्प का कठोर रुख और कमला हैरिस की कूटनीतिक नीति, दोनों के अपने फायदे हैं। हालांकि, भारत के लिए जो सबसे महत्वपूर्ण है, वह यह है कि चाहे कोई भी सत्ता में आए, दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, तकनीक और आपसी विश्वास को बनाए रखना ज़रूरी है।

