लेबनान में हाल ही में हुए ब्लास्ट में 11 लोगों की मौत और 3000 से अधिक लोग घायल हो गए। घटना के बाद इस हादसे से जुड़े कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। कहा जा रहा है कि हिजबुल्लाह लड़ाके इस घटना के लिए पेजर डिवाइस का इस्तेमाल कर रहे थे, जो पहले सुरक्षा और संचार के लिए प्रयोग होता था। लेकिन सवाल यह है कि पेजर जैसी पुरानी तकनीक को ब्लास्ट के लिए कैसे इस्तेमाल किया गया?
पेजर क्या है?
पेजर एक वायरलेस संचार उपकरण है, जिसका उपयोग संदेश भेजने और प्राप्त करने के लिए किया जाता है। यह मुख्य रूप से 1980 और 1990 के दशकों में बहुत प्रचलित था। इसे उस समय अस्पतालों, व्यापारिक जगत और सुरक्षाबलों में इस्तेमाल किया जाता था। हालांकि, आज के आधुनिक स्मार्टफोन्स के युग में पेजर का उपयोग बहुत कम हो गया है।
हिजबुल्लाह द्वारा पेजर का उपयोग:
हिजबुल्लाह, एक कट्टरपंथी समूह जो लेबनान में सक्रिय है, ने पेजर तकनीक का उपयोग एक हथियार के रूप में किया। सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट्स के मुताबिक, लड़ाके पेजर के सिग्नल का इस्तेमाल कर रहे थे ताकि विस्फोटक उपकरणों को दूर से नियंत्रित किया जा सके।
कैसे काम किया बैटरी हैकिंग से?
पेजर तकनीक को विस्फोट के लिए तैयार करने के लिए इसमें बैटरी और सर्किट्स को हैक किया गया। लड़ाकों ने पेजर की बैटरी को मॉडिफाई कर उसे एक डिटोनेटर से जोड़ा, जिससे संदेश प्राप्त होते ही विस्फोट हो सके। यह तरीका पहले बहुत जटिल नहीं था, लेकिन इसमें टेक्नोलॉजी का अत्यधिक उपयोग किया गया।
इसकी गंभीरता:
लेबनान की सरकार और सुरक्षा बल अब इस घटना के बाद सतर्क हो गए हैं। पेजर जैसी साधारण दिखने वाली डिवाइस का इस्तेमाल हथियार के रूप में किया जा सकता है, यह दिखाता है कि आतंकवादी संगठन लगातार नई-नई तकनीक का सहारा ले रहे हैं।
आगे की चुनौतियां:
यह घटना साबित करती है कि पुरानी तकनीकों का उपयोग भी बेहद खतरनाक हो सकता है। सुरक्षा एजेंसियों को अब ऐसी तकनीकों की मॉनिटरिंग बढ़ानी होगी जो आमतौर पर खतरे की श्रेणी में नहीं आती थीं।

