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दूर्वा अष्टमी 11 सितंबर को:गणेश जी को सबसे पहले कश्यप ऋषि ने चढ़ाई थी दूर्वा, अनलासुर से जुड़ी है दूब चढ़ाने की कथा

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गणेश चतुर्थी के 4 दिन बाद यानी पंचांग के मुताबिक भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की आठवीं तिथि पर दूर्वाष्टमी व्रत होता है। इस बार ये 11 सितंबर को रहेगा। इस दिन भगवान गणेश को खासतौर से दूर्वा चढ़ाने की परंपरा है।

माना जाता है इस दिन दूर्वा से गणेशजी की विशेष पूजा करने से हर तरह की परेशानियां दूर होती हैं और मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं। इससे जुड़ी कथा पुराणों में भी है। जिसमें राक्षस को मारने के बाद गणेशजी को दूर्वा चढ़ाई और तब से ये परंपरा चली आ रही है। दूर्वा के बिना अधूरे हैं कर्मकांड और मांगलिक काम हिन्दू संस्कारों और कर्मकाण्ड में इसका उपयोग खासतौर से किया जाता है। हिन्दू मान्यताओं में दूर्वा घास प्रथम पूजनीय भगवान श्रीगणेश को बहुत प्रिय है। इसलिए किसी भी तरह की पूजा और हर तरह के मांगलिक कामों में दूर्वा को सबसे पहले लिया जाता है।

इस पवित्र घास के बिना, गृहप्रवेश, मुंडन और विवाह सहित अन्य मांगलिक काम अधूरे माने जाते हैं। भगवान गणेश की पूजा में दो, तीन या पाँच दूर्वा अर्पण करने का विधान तंत्र शास्त्र में मिलता है।

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