डायबिटीज से ग्रस्त लोगों को अपनी दिनचर्या में कई सावधानियां बरतनी पड़ती हैं, जिनमें खानपान, दवाएं और नियमित व्यायाम प्रमुख हैं। लेकिन एक और महत्वपूर्ण कारक जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, वह है मानसिक तनाव (स्ट्रेस)। विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज के मरीजों को हद से ज्यादा स्ट्रेस लेने से बचना चाहिए, क्योंकि यह उनकी सेहत पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है और कई गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है।
स्ट्रेस और डायबिटीज का संबंध:
- ब्लड शुगर का असंतुलन: अत्यधिक तनाव शरीर में हार्मोनल असंतुलन पैदा करता है, जिससे कोर्टिसोल और एड्रेनलिन जैसे स्ट्रेस हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। यह हार्मोन शरीर में ब्लड शुगर लेवल को प्रभावित करते हैं, जिससे डायबिटीज के मरीजों का शुगर लेवल अनियंत्रित हो सकता है। इससे शुगर लेवल अचानक बढ़ सकता है, जिसे नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है।
- इंसुलिन प्रतिरोध: स्ट्रेस इंसुलिन प्रतिरोध को भी बढ़ा सकता है, जिससे शरीर में इंसुलिन का प्रभाव कम हो जाता है। इससे डायबिटीज का प्रबंधन और मुश्किल हो जाता है, और रक्त शर्करा का स्तर बढ़ने लगता है।
स्ट्रेस से होने वाली स्वास्थ्य समस्याएं:
- दिल की बीमारियां: ज्यादा स्ट्रेस लेने से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, जिससे डायबिटीज के मरीजों में हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। लंबे समय तक स्ट्रेस में रहने से दिल की बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है।
- नर्व डैमेज: अत्यधिक तनाव से डायबिटीज से जुड़ी न्यूरोपैथी यानी नसों की क्षति होने का खतरा बढ़ जाता है। इससे हाथ-पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन, और दर्द जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
- नींद की कमी: स्ट्रेस से नींद पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। डायबिटीज के मरीजों को पर्याप्त और गहरी नींद की जरूरत होती है, लेकिन तनाव के कारण उनकी नींद की गुणवत्ता खराब हो सकती है, जिससे ब्लड शुगर का स्तर बढ़ सकता है।
- प्रतिरक्षा प्रणाली पर असर: स्ट्रेस शरीर की इम्यूनिटी को कमजोर करता है, जिससे डायबिटीज के मरीजों में संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। लंबे समय तक तनाव में रहने से शरीर में सूजन भी बढ़ सकती है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
तनाव प्रबंधन के उपाय:
- योग और ध्यान: योग और ध्यान मानसिक शांति और तनाव कम करने के लिए सबसे प्रभावी उपायों में से एक हैं। ये न केवल मानसिक तनाव को कम करते हैं बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाते हैं।
- नियमित व्यायाम: नियमित रूप से व्यायाम करने से शरीर में एंडोर्फिन हार्मोन का उत्पादन बढ़ता है, जो तनाव को कम करने में मदद करता है। इसके साथ ही, व्यायाम से ब्लड शुगर को भी नियंत्रित किया जा सकता है।
- समय पर दवा और पोषण: दवाओं का सही समय पर सेवन और एक संतुलित आहार भी ब्लड शुगर लेवल को स्थिर रखने में मदद करता है, जिससे तनाव का स्तर कम हो सकता है।
- परिवार और दोस्तों का समर्थन: मानसिक तनाव को कम करने के लिए परिवार और दोस्तों का भावनात्मक समर्थन बहुत महत्वपूर्ण होता है। किसी से बात करने से तनाव का स्तर कम हो सकता है और मानसिक शांति मिलती है।

