मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच जल्द ही एक महत्वपूर्ण बातचीत होने की संभावना है। यह बातचीत हिज़्बुल्लाह के प्रमुख हसन नसरल्लाह के खात्मे के बाद पहली बार होगी, जिसने इस क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है। इस फोन कॉल को युद्ध विराम की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, क्योंकि अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते सहयोग और इस्लामी आतंकवाद के खिलाफ कड़े कदमों के संकेत मिल रहे हैं।
हिज़्बुल्लाह के नेता नसरल्लाह का खात्मा और बढ़ता तनाव
हाल ही में हिज़्बुल्लाह के प्रमुख हसन नसरल्लाह की मौत के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। हिज़्बुल्लाह एक शिया मिलिशिया समूह है, जो लंबे समय से इजराइल के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष में शामिल रहा है। नसरल्लाह की मौत से हिज़्बुल्लाह की गतिविधियों में कमी आ सकती है, लेकिन इसने लेबनान और इजराइल के बीच जारी संघर्ष को नई दिशा दे दी है।
बाइडन-नेतन्याहू की बातचीत पर निगाहें
जो बाइडन और बेंजामिन नेतन्याहू के बीच होने वाली यह बातचीत अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रों में है, क्योंकि इससे युद्ध की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव आ सकता है। अमेरिका लंबे समय से इजराइल का समर्थन करता रहा है, लेकिन साथ ही वह क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए भी काम कर रहा है। इस कॉल से उम्मीद की जा रही है कि दोनों नेता मिलकर किसी समाधान की ओर बढ़ सकते हैं, जिससे संघर्ष कम हो सके।
क्या रुक सकता है युद्ध?
नसरल्लाह की मौत के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या इजराइल और हिज़्बुल्लाह के बीच जारी युद्ध अब रुक सकता है। हालांकि, हिज़्बुल्लाह की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन नसरल्लाह की अनुपस्थिति संगठन की शक्ति को कमजोर कर सकती है। इस स्थिति में इजराइल और अमेरिका के बीच की यह बातचीत शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का एक मौका हो सकता है।
अमेरिकी रणनीति और मध्य पूर्व में शांति प्रयास
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन पहले भी इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष के बीच शांति स्थापित करने के प्रयास कर चुके हैं, लेकिन इसमें उन्हें सीमित सफलता मिली है। नसरल्लाह के खात्मे के बाद, अमेरिका इस मौके का फायदा उठाकर इजराइल और लेबनान के बीच बातचीत के माध्यम से एक स्थायी समाधान की दिशा में कदम बढ़ा सकता है।
नेतन्याहू की रणनीति
बेंजामिन नेतन्याहू का रुख अब तक बेहद सख्त रहा है, लेकिन अमेरिका के दबाव में वह बातचीत के लिए तैयार हो सकते हैं। इजराइल की सुरक्षा हमेशा से उनकी प्राथमिकता रही है, और नसरल्लाह की मौत ने उन्हें एक कूटनीतिक मौके के रूप में देखा जा रहा है। अब यह देखना होगा कि नेतन्याहू किस तरह इस मौके को भुनाते हैं और क्या वह क्षेत्र में स्थायी शांति की ओर कदम बढ़ाएंगे।

