पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने हाल ही में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की, जिसके बाद उन्होंने कांग्रेस नेता रनवीत बिट्टू और शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल पर तीखा हमला बोला। भगवंत मान के इस कदम से राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है। मान ने दोनों नेताओं पर भ्रष्टाचार और जनविरोधी नीतियों का आरोप लगाते हुए कहा कि ये लोग पंजाब की जनता के हितों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
बिट्टू पर सीधा निशाना: आरोपों की बौछार
मान ने कांग्रेस नेता और लुधियाना के सांसद रनवीत बिट्टू पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक करियर में जनता की बजाय अपने व्यक्तिगत हितों को अधिक प्राथमिकता दी। मान का आरोप है कि बिट्टू ने कांग्रेस के राज में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया और पंजाब के विकास में कोई योगदान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि बिट्टू जैसे नेता पंजाब की तरक्की में बाधा बने हुए हैं और अब वक्त आ गया है कि जनता इन्हें सही जवाब दे।
सुखबीर बादल पर आरोप: अकाली दल की ‘जनविरोधी नीतियों’ का मुद्दा उठाया
सुखबीर सिंह बादल पर निशाना साधते हुए मान ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल की नीतियां जनता के खिलाफ रही हैं। मान का आरोप है कि बादल परिवार ने वर्षों तक पंजाब में सत्ता का दुरुपयोग किया और प्रदेश की संपत्तियों को अपने हित में इस्तेमाल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अकाली दल ने पंजाब के लोगों की मूलभूत समस्याओं को अनदेखा किया और सिर्फ अपनी पार्टी के हितों को बढ़ावा दिया।
जेपी नड्डा से मुलाकात का क्या है उद्देश्य?
जेपी नड्डा के साथ हुई इस बैठक को पंजाब की राजनीति में भाजपा के साथ आप की बढ़ती करीबी के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि भगवंत मान और नड्डा के बीच राज्य के विकास और आगामी चुनावी रणनीतियों को लेकर चर्चा हुई। हालांकि भगवंत मान ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता पंजाब का विकास है, और इसके लिए वे सभी राजनीतिक दलों के साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं।
आगामी चुनावी समीकरणों पर असर
भगवंत मान के इन बयानों से स्पष्ट है कि आगामी चुनावों में वे कांग्रेस और अकाली दल के खिलाफ तीखे तेवर अपनाएंगे। मान का कहना है कि पंजाब के विकास और जनता के हितों की रक्षा के लिए भ्रष्टाचार के खिलाफ यह लड़ाई जारी रहेगी। भाजपा के साथ मुलाकात और दोनों विरोधी दलों पर हमला करते हुए मान ने यह संकेत दे दिया है कि आम आदमी पार्टी अब सीधे तौर पर इन दलों के खिलाफ खड़ी है और पंजाब के लोगों को भ्रष्टाचार मुक्त शासन देने के लिए संकल्पित है।
इस घटनाक्रम से यह साफ हो गया है कि भगवंत मान विपक्षी दलों के नेताओं पर दबाव बनाने और भाजपा के साथ संभावित गठबंधन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

