थाईलैंड के एक छोटे शहर में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक स्कूल बस में आग लगने से 25 छात्रों की मौत हो गई। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, बस में अचानक आग लगी और उसमें मौजूद छात्रों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिल पाया। इस दर्दनाक घटना ने दुनियाभर में सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना का विवरण
थाईलैंड के एक ग्रामीण इलाके में छात्रों को लेकर जा रही एक स्कूल बस में सुबह अचानक आग लग गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग इतनी तेजी से फैली कि बस के ड्राइवर और अन्य स्टाफ को बच्चों को निकालने का मौका नहीं मिला। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि इस हादसे में 25 छात्रों की मौके पर ही मौत हो गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। बस में आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है, लेकिन शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट को संभावित कारण बताया जा रहा है।
भारत में स्कूल बसों को लेकर क्या हैं नियम?
इस दुखद घटना के बाद भारत में स्कूल बसों की सुरक्षा और उनसे जुड़े नियमों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। भारत में स्कूल बसों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए कई नियम और दिशानिर्देश लागू किए गए हैं, ताकि बच्चों को सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिल सके। यहां भारत में स्कूल बसों के लिए कुछ मुख्य सुरक्षा नियमों की जानकारी दी जा रही है:
1. स्कूल बसों के लिए रंग और चिन्ह
भारत में नियमों के अनुसार, सभी स्कूल बसों का पीला रंग होना अनिवार्य है। इसके साथ ही बस के आगे और पीछे “स्कूल बस” लिखा होना चाहिए। अगर बस किसी अन्य काम के लिए भी इस्तेमाल हो रही हो, तो “ऑन स्कूल ड्यूटी” लिखा होना चाहिए।
2. ड्राइवर और स्टाफ के लिए नियम
स्कूल बस के ड्राइवर की उम्र कम से कम 25 साल होनी चाहिए और उसके पास कम से कम 5 साल का भारी वाहन चलाने का अनुभव होना चाहिए। इसके साथ ही, ड्राइवर के पास एक वैध लाइसेंस और पुलिस द्वारा सत्यापित बैकग्राउंड चेक होना जरूरी है। साथ ही, बस में एक प्रशिक्षित अटेंडेंट होना चाहिए जो बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।
3. बस की तकनीकी सुरक्षा
स्कूल बसों में स्पीड गवर्नर (स्पीड लिमिट डिवाइस) लगाना जरूरी है, ताकि बस 40 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की गति से न चले। इसके अलावा, बस में फायर एग्जिट (आग से बचने का आपातकालीन दरवाजा) होना चाहिए और प्राथमिक चिकित्सा किट भी उपलब्ध होनी चाहिए। हर बस में सीसीटीवी कैमरे और जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम होना अनिवार्य किया गया है ताकि बस की निगरानी की जा सके।
4. सीट बेल्ट और सीटिंग अरेंजमेंट
स्कूल बस में सभी छात्रों के लिए सीट बेल्ट का होना अनिवार्य है। इसके साथ ही बस में बैठने की व्यवस्था के अनुसार अधिकतम सीट क्षमता से ज्यादा बच्चों को बैठाना गैर-कानूनी है।
5. रूट की योजना और स्टॉप का चयन
स्कूल बसों के लिए एक निर्धारित रूट तय होना चाहिए और सभी स्टॉप सुरक्षित स्थानों पर होने चाहिए। बच्चों को सड़क के उस तरफ उतरने की व्यवस्था होनी चाहिए, जहां से उन्हें सीधे स्कूल में प्रवेश या घर में प्रवेश मिल सके।
6. बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी
स्कूल प्रशासन और बस सेवा प्रदाता की जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। बस की नियमित रूप से मेंटेनेंस होनी चाहिए और उसमें कोई तकनीकी खामी न हो। इसके अलावा, बस में फायर एक्सटिंग्विशर और इमरजेंसी अलार्म का होना अनिवार्य है।
भारत में स्कूल बस सुरक्षा के उपायों की स्थिति
हालांकि भारत में कई जगहों पर इन नियमों का कड़ाई से पालन होता है, लेकिन कुछ ग्रामीण और छोटे शहरों में नियमों का उल्लंघन देखने को मिलता है। इन घटनाओं के बाद माता-पिता और स्कूल प्रशासन को चाहिए कि वे बस की सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दें और यह सुनिश्चित करें कि उनके बच्चे सुरक्षित यात्रा कर रहे हैं।

