गुरु नानक जयंती विशेष: गुरु नानक की सीख – संकल्प मजबूत हो तो बुरी आदतें भी बदल सकती हैं
गुरु नानक देव जी का जन्म सिख धर्म के संस्थापक और पहले गुरु के रूप में माना जाता है। उनका जन्मदिन, जिसे गुरु नानक जयंती के रूप में मनाया जाता है, इस वर्ष शुक्रवार को विशेष श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। गुरु नानक देव जी ने जीवनभर मानवता को एकता, सहानुभूति, सच्चाई, और सरल जीवन जीने का संदेश दिया।
बुरी आदतों को छोड़ने का संकल्प
गुरु नानक देव जी ने सिखाया कि यदि इंसान का संकल्प दृढ़ हो, तो वह बुरी आदतों और कमजोरियों को आसानी से छोड़ सकता है। उनका मानना था कि आत्म-संयम और आत्म-नियंत्रण के माध्यम से जीवन में किसी भी बुरी आदत को त्यागना संभव है। उन्होंने “मन जीतै जग जीत” का सिद्धांत दिया, जिसका अर्थ है कि यदि हम अपने मन पर नियंत्रण पा लें, तो दुनिया की हर चुनौती को पार कर सकते हैं।
गुरु नानक की प्रमुख शिक्षाएं
- सच्चा आचरण: गुरु नानक देव जी का मानना था कि केवल धार्मिक अनुष्ठानों से नहीं बल्कि सच्चे आचरण और सेवा भाव से ईश्वर की प्राप्ति हो सकती है। उन्होंने “किरत करो, नाम जपो, और वंड छको” का संदेश दिया, जो जीवन में सच्चाई, मेहनत और दान का महत्व बताता है।
- भ्रातृत्व और समानता: गुरु नानक देव जी ने हर व्यक्ति को समान माना और समाज में ऊँच-नीच और भेदभाव का विरोध किया। उनका मानना था कि सभी मनुष्य एक ही ईश्वर की संतान हैं और हमें एक-दूसरे के साथ समानता और सम्मान का व्यवहार करना चाहिए।
- आध्यात्मिकता और सेवा: गुरु नानक देव जी ने जीवन को केवल साधना नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम माना। उन्होंने लोगों को अपने अंदर ईश्वर को पहचानने और दूसरों की सेवा करने का संदेश दिया।
गुरु नानक जयंती का महत्व
इस पवित्र अवसर पर, गुरुद्वारों में कीर्तन, लंगर और सेवा के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। लोग गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए अपने जीवन को सुधारने का संकल्प लेते हैं। इस अवसर पर उनकी शिक्षाओं का पालन करते हुए, बहुत से लोग बुरी आदतें छोड़ने और जीवन में सकारात्मकता लाने का संकल्प लेते हैं।
