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कार्तिक महीने के 3 प्रमुख व्रत-पर्व: आज देवउठनी एकादशी, 14 को वैकुंठ चतुर्दशी और 15 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा

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हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक महीने का विशेष महत्व होता है, और इस महीने में तीन प्रमुख व्रत-पर्व मनाए जाते हैं। देवउठनी एकादशी से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक कई धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-पाठ किए जाते हैं। आइए जानते हैं इस महीने के इन तीन बड़े पर्वों के बारे में विस्तार से।

1. देवउठनी एकादशी (10 नवंबर)

आज देवउठनी एकादशी का पावन पर्व मनाया जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु चार महीने के योग निद्रा से जागते हैं और सृष्टि का संचालन फिर से आरंभ करते हैं। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है, और तुलसी विवाह का भी आयोजन किया जाता है। देवउठनी एकादशी से ही विवाह और अन्य शुभ कार्यों की शुरुआत होती है, इसलिए इसे “प्रबोधिनी एकादशी” भी कहा जाता है।

2. वैकुंठ चतुर्दशी (14 नवंबर)

वैकुंठ चतुर्दशी का पर्व भगवान विष्णु और भगवान शिव के मिलन का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने स्वयं काशी जाकर भगवान शिव की पूजा की थी। इस दिन भगवान शिव और विष्णु दोनों की संयुक्त पूजा करने से भक्तों को विशेष फल की प्राप्ति होती है। वैकुंठ चतुर्दशी के अवसर पर काशी, उज्जैन, और अन्य तीर्थस्थलों पर विशेष आयोजन किए जाते हैं और श्रद्धालु गंगा स्नान कर पुण्य अर्जित करते हैं।

3. कार्तिक पूर्णिमा (15 नवंबर)

कार्तिक पूर्णिमा को “देव दिवाली” के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन गंगा और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन सभी देवता पृथ्वी पर आकर गंगा स्नान करते हैं। काशी में इस दिन दीपदान का विशेष महत्व है और गंगा घाटों पर हजारों दीये जलाए जाते हैं। कार्तिक पूर्णिमा पर दान-पुण्य, गंगा स्नान, और दीपदान से अत्यधिक पुण्य की प्राप्ति होती है।

धार्मिक महत्व और उत्सव का माहौल

इन तीनों पर्वों के माध्यम से कार्तिक माह में विशेष धार्मिक उत्साह देखने को मिलता है। देवउठनी एकादशी से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक श्रद्धालु अपने घरों में और मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं।