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कार्तिक पूर्णिमा 15 नवंबर को: सूर्य को अर्घ्य और तुलसी के पास दीपक जलाने का महत्व

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इस साल कार्तिक पूर्णिमा का पर्व 15 नवंबर को मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में कार्तिक पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है, और इसे देवताओं के प्रिय महीनों में से एक माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से सूर्य और चंद्र को अर्घ्य अर्पित करते हैं और तुलसी के पास दीपक जलाते हैं। इस अवसर पर गंगा स्नान, पूजा-अर्चना और दान करने का भी विशेष महत्व है।

कार्तिक पूर्णिमा का महत्व

कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने पृथ्वी पर अपने विभिन्न अवतारों से देवताओं का कल्याण किया था। इसके अलावा, इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का संहार किया था, इसलिए इसे “त्रिपुरी पूर्णिमा” भी कहते हैं। कार्तिक पूर्णिमा पर किए गए धार्मिक कार्य और पूजा-अर्चना से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

कैसे करें पूजा

1. सूर्योदय के समय सूर्य को अर्घ्य

2. सूर्यास्त के बाद चंद्र को अर्घ्य

3. तुलसी के पास दीपक जलाएं

4. गंगा स्नान और दान

आध्यात्मिक लाभ

कार्तिक पूर्णिमा पर किए गए पूजा-पाठ और धार्मिक कार्य से व्यक्ति को मानसिक शांति और आत्मिक सुख की प्राप्ति होती है। इस दिन किए गए दान-पुण्य से पिछले जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में खुशहाली आती है।

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