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कनाडा का भारतीय कॉन्सुलेट शिविरों को सुरक्षा देने से इनकार: भारतीय उच्चायोग ने पेंशनर्स की सुविधा के शिविर किए रद्द

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कनाडा में भारतीय पेंशनर्स की सुविधा के लिए लगाए जाने वाले कॉन्सुलेट शिविरों को लेकर एक बड़ा बदलाव सामने आया है। कनाडा सरकार ने इन शिविरों को सुरक्षा प्रदान करने से इनकार कर दिया, जिसके चलते भारतीय उच्चायोग को यह शिविर रद्द करने का निर्णय लेना पड़ा। ये शिविर उन भारतीय नागरिकों, विशेषकर बुजुर्ग पेंशनर्स की मदद के लिए लगाए जाने थे जो अपने दूतावास से पेंशन से जुड़ी सेवाएं प्राप्त करना चाहते थे।

सुरक्षा प्रदान न करने का कारण

कनाडा की ओर से इन शिविरों को सुरक्षा न देने का निर्णय कुछ समय से दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनजर लिया गया है। भारत-कनाडा के बीच राजनयिक तनाव के चलते दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ता जा रहा है, और इस स्थिति का असर अब पेंशनर्स की सुविधा के लिए आयोजित किए जाने वाले शिविरों पर भी पड़ रहा है। कनाडा के इस कदम को भारतीय उच्चायोग ने निराशाजनक बताया है, क्योंकि इसका सीधा असर उन बुजुर्ग नागरिकों पर पड़ता है जो इन सेवाओं पर निर्भर हैं।

पेंशनर्स को हो रही परेशानी

कनाडा में बड़ी संख्या में भारतीय पेंशनर्स रहते हैं जो भारत में अर्जित पेंशन सुविधाओं के लिए भारतीय दूतावास की सेवाओं पर निर्भर हैं। शिविरों के रद्द होने से अब उन्हें वीजा, पेंशन सत्यापन, और अन्य कागजी कार्यों के लिए व्यक्तिगत रूप से दूतावास जाना पड़ेगा, जिससे उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

उच्चायोग का बयान

भारतीय उच्चायोग ने इस घटनाक्रम पर बयान जारी करते हुए कहा है कि उनकी कोशिश थी कि ये शिविर स्थानीय स्तर पर बुजुर्गों की मदद के लिए लगाए जाएं। लेकिन सुरक्षा के अभाव में अब यह संभव नहीं है। उच्चायोग ने कहा कि वे बुजुर्गों के लिए अन्य विकल्प तलाश रहे हैं ताकि उन्हें आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

भारत-कनाडा के बिगड़ते संबंधों का असर

भारत और कनाडा के बीच हाल के दिनों में बढ़ते राजनयिक तनाव का असर दोनों देशों के नागरिकों पर पड़ रहा है। कुछ समय पहले भी दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों की संख्या में कमी की थी और व्यापारिक समझौतों पर भी रोक लगाई थी। इस विवाद के कारण विशेष रूप से भारतीय पेंशनर्स और अन्य वीजा-सम्बंधी सेवाओं में परेशानियां बढ़ती जा रही हैं।

फ्यूचर में संभावित समाधान

भारतीय उच्चायोग और कनाडा सरकार के बीच अगर राजनयिक संबंधों में सुधार आता है, तो पेंशनर्स के लिए शिविरों का आयोजन फिर से संभव हो सकता है। अभी तक उच्चायोग ने सुझाव दिया है कि भारतीय पेंशनर्स व्यक्तिगत रूप से दूतावास से संपर्क कर सकते हैं या ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग कर सकते हैं।