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कंगाल पाकिस्तान में बड़ा सरकारी फेरबदल: 1,50,000 नौकरियां खत्म, 6 मंत्रालय होंगे बंद, IMF के दबाव में शरीफ सरकार

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पाकिस्तान की गंभीर आर्थिक हालत ने देश की सत्तारूढ़ शरीफ सरकार को कठोर फैसले लेने पर मजबूर कर दिया है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से मिली वित्तीय सहायता के बदले पाकिस्तान सरकार को व्यापक आर्थिक सुधारों के तहत सरकारी ढांचे में बड़े बदलाव करने पड़ रहे हैं। इस सुधार के तहत लगभग 1,50,000 सरकारी नौकरियों को खत्म किया जाएगा, साथ ही 6 मंत्रालयों को बंद करने की तैयारी की जा रही है।

IMF की शर्तें और सरकार का फैसला

पाकिस्तान की सरकार लंबे समय से IMF के दबाव में है, जिसने देश को कर्ज राहत और वित्तीय मदद के लिए सख्त शर्तें रखी हैं। शरीफ सरकार ने IMF की शर्तों को मानते हुए सरकारी खर्चों में कटौती का फैसला किया है। इस योजना के अंतर्गत सरकार की ओर से 1,50,000 कर्मचारियों को हटाने और 6 मंत्रालयों को बंद करने की घोषणा की गई है।

कौन से मंत्रालय होंगे प्रभावित?

सूत्रों के अनुसार, जिन मंत्रालयों को बंद करने की योजना बनाई जा रही है, उनमें संचार, नागरिक उड्डयन, औद्योगिक उत्पादन, सूचना प्रौद्योगिकी, जल संसाधन और मानव संसाधन विकास शामिल हैं। इन मंत्रालयों के बंद होने से कई अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा।

आर्थिक संकट और बेरोजगारी का खतरा

पाकिस्तान पहले से ही गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है, और बढ़ती बेरोजगारी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। इतनी बड़ी संख्या में सरकारी नौकरियों के खत्म होने से जनता में असंतोष और बढ़ सकता है। इसके साथ ही, IMF की शर्तों के चलते पेट्रोल, बिजली, और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी भारी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, जो आम लोगों के जीवन पर गहरा असर डाल रही है।

शरीफ सरकार की आलोचना

शरीफ सरकार के इस फैसले की आलोचना भी हो रही है। विपक्षी पार्टियां और श्रमिक संगठन इसे आम जनता पर बोझ बढ़ाने वाला कदम बता रहे हैं। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) और तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने इस फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार IMF के सामने घुटने टेक चुकी है और इस फैसले का सीधा असर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ेगा।

IMF और पाकिस्तान के रिश्ते

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पिछले कुछ वर्षों में बड़े संकट का सामना कर रही है, और IMF उसकी मदद के लिए सबसे बड़ा वित्तीय स्रोत बना हुआ है। हालांकि, IMF की शर्तें सख्त होती जा रही हैं, जिससे देश के आर्थिक और सामाजिक ताने-बाने पर गहरा असर पड़ रहा है।

नतीजा:

पाकिस्तान की आर्थिक हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है, और IMF की शर्तों के तहत शरीफ सरकार को कठोर कदम उठाने पड़ रहे हैं। 1,50,000 सरकारी नौकरियों का खत्म होना और 6 मंत्रालयों का बंद होना एक बड़ा झटका साबित हो सकता है, जिससे बेरोजगारी और आर्थिक अस्थिरता और बढ़ सकती है।