मध्य पूर्व में जारी तनाव और हिंसा के बीच, ईरान के राजदूत ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने भारत से अपील की है कि वह इजरायल को मनाए, ताकि मिडिल ईस्ट में शांति स्थापित की जा सके। साथ ही, उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान ने हिजबुल्लाह के समर्थन में कोई हमला नहीं किया है, जैसा कि इजरायल आरोप लगा रहा है।
ईरानी राजदूत का बयान: भारत की भूमिका महत्वपूर्ण
ईरानी राजदूत का कहना है कि भारत एक महत्वपूर्ण वैश्विक शक्ति है, और उसका मिडिल ईस्ट में शांति स्थापित करने में अहम योगदान हो सकता है। उन्होंने कहा, “भारत और इजरायल के बीच अच्छे संबंध हैं, और भारत इजरायल को समझाने की स्थिति में है। अगर भारत इजरायल को मना लेता है, तो मिडिल ईस्ट में लंबे समय से चल रही हिंसा को खत्म किया जा सकता है।”
हिजबुल्लाह को समर्थन के आरोपों पर सफाई
इजरायल ने हाल ही में आरोप लगाया था कि ईरान हिजबुल्लाह को हथियार और वित्तीय सहायता देकर उसका समर्थन कर रहा है, जिसके चलते सीमा पर तनाव बढ़ रहा है। इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी राजदूत ने कहा, “हमारा हिजबुल्लाह के समर्थन में किसी भी हमले में शामिल होने का कोई इरादा नहीं था। हमारा उद्देश्य मिडिल ईस्ट में शांति और स्थिरता स्थापित करना है, न कि किसी आतंकवादी संगठन का समर्थन करना।”
ईरान-इजरायल के बीच बढ़ता तनाव
पिछले कुछ समय से ईरान और इजरायल के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इजरायल ने ईरान पर हिजबुल्लाह, हमास और अन्य आतंकी संगठनों को समर्थन देने का आरोप लगाया है, जबकि ईरान इसे नकारता रहा है। इस तनाव के चलते पूरे मिडिल ईस्ट क्षेत्र में अस्थिरता फैली हुई है।
भारत की भूमिका पर चर्चा
ईरानी राजदूत के इस बयान से साफ है कि ईरान को भारत से बड़ी उम्मीदें हैं। भारत, जो मिडिल ईस्ट के देशों के साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से जुड़ा है, एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में यहां शांति स्थापित करने में अहम भूमिका निभा सकता है। भारत के इजरायल और ईरान दोनों से अच्छे कूटनीतिक संबंध हैं, और ऐसे में भारत एक पुल का काम कर सकता है, जो दोनों देशों के बीच संवाद और शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मददगार हो सकता है।

