इजराइल-हमास जंग में खंडहर बना गाजा: एक साल में 60% इमारतें तबाह, दोबारा बनाने में लगेंगे 80 साल
इजराइल और हमास के बीच जारी हिंसा ने गाजा को पूरी तरह से खंडहर में तब्दील कर दिया है। पिछले एक साल में हुए भीषण हमलों और संघर्षों के कारण गाजा की 60% इमारतें पूरी तरह से नष्ट हो चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं होता, तो गाजा को फिर से बनाने में लगभग 80 साल लग सकते हैं।
जंग का भयानक प्रभाव
गाजा, जो पहले से ही संघर्षों और गरीबी से जूझ रहा था, अब एक विनाशकारी युद्ध के कारण पूरी तरह से तबाही का शिकार हो चुका है। इमारतें, स्कूल, अस्पताल और घर ध्वस्त हो चुके हैं, जिससे हजारों लोग बेघर हो गए हैं। बुनियादी ढांचे का इतना नुकसान हुआ है कि जरूरी सेवाएं जैसे बिजली, पानी और स्वास्थ्य सुविधाएं भी बुरी तरह प्रभावित हो चुकी हैं।
तबाही का आंकलन
संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों के अनुसार, गाजा की पुनर्निर्माण प्रक्रिया एक विशाल चुनौती साबित होगी। एक रिपोर्ट के मुताबिक, गाजा की लगभग 60% इमारतें, जिनमें सरकारी कार्यालय, आवासीय कॉम्प्लेक्स और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान शामिल हैं, पूरी तरह से तबाह हो चुके हैं। ये हालात तब हैं जब युद्धविराम की कोशिशें लगातार की जा रही हैं, लेकिन संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा।
पुनर्निर्माण की चुनौतियां
गाजा के पुनर्निर्माण के लिए भारी मात्रा में धन और संसाधनों की आवश्यकता होगी, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में यह कार्य अत्यंत कठिन दिखाई दे रहा है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध जारी रहा, तो इमारतों का पुनर्निर्माण असंभव हो सकता है। मौजूदा वैश्विक आर्थिक संकट और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण गाजा के लिए आवश्यक सामग्री और संसाधनों की आपूर्ति भी बाधित हो रही है।
मानवता पर संकट
इस जंग ने न केवल भौतिक ढांचे को नष्ट किया है, बल्कि गाजा के निवासियों की मानसिक और शारीरिक स्थिति पर भी गंभीर असर डाला है। हजारों लोग अपने घरों से बेघर हो गए हैं, और इन हालातों में उन्हें दैनिक जीवन की मूलभूत जरूरतें भी पूरी नहीं हो पा रही हैं। इस क्षेत्र में बच्चों और महिलाओं की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि वे सबसे अधिक प्रभावित समूहों में से हैं।
अंतरराष्ट्रीय सहायता की जरूरत
गाजा के पुनर्निर्माण के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की सहायता अत्यंत महत्वपूर्ण है। कई देशों और संस्थाओं ने मदद का वादा किया है, लेकिन वास्तविकता यह है कि युद्ध की स्थिति में इन योजनाओं को लागू करना अत्यंत मुश्किल हो रहा है।
अगर जल्द ही शांति स्थापित नहीं होती है, तो गाजा की यह तबाही और भी लंबे समय तक जारी रह सकती है, और इस क्षेत्र को फिर से खड़ा करना एक बहुत बड़ी चुनौती बन जाएगा।
