वायु प्रदूषण और बदलते मौसम के कारण अस्थमा के मरीजों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। हवा में घुले प्रदूषकों और ठंड के चलते अस्थमा के दौरे का खतरा बढ़ जाता है, जिससे सांस लेने में तकलीफ, सीने में जकड़न और खांसी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में अस्थमा के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
कैसे हो रही है अस्थमा मरीजों को तकलीफ?
- प्रदूषण और धुएं से खतरा: हवा में प्रदूषक कण (PM 2.5, PM 10) और धुआं सांस के साथ फेफड़ों में चले जाते हैं, जिससे अस्थमा के दौरे की आशंका बढ़ जाती है।
- ठंड और नमी का असर: सर्दियों में ठंडी हवा और वातावरण में नमी बढ़ने से श्वसन नलिकाओं में जलन होती है, जिससे सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
- संक्रमण का खतरा: ठंड में वायरल संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है, जो अस्थमा के मरीजों के लिए घातक साबित हो सकता है।
किन बातों का ख्याल रखना है?
- मास्क का उपयोग करें: बाहर निकलते समय N95 मास्क पहनें, ताकि प्रदूषक कण फेफड़ों तक न पहुंच सकें।
- घर के अंदर रहें: प्रदूषण स्तर बढ़ने पर बाहर निकलने से बचें और घर में एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें।
- इन्हेलर हमेशा रखें साथ: डॉक्टरी सलाह के अनुसार इन्हेलर का उपयोग करें और इसे हमेशा अपने पास रखें।
- धूल और धुएं से बचें: धूल, धुएं और परफ्यूम जैसी चीजों से दूर रहें, क्योंकि ये अस्थमा के दौरे को बढ़ा सकते हैं।
- डाइट और हाइड्रेशन पर ध्यान दें: संतुलित आहार लें और पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, ताकि शरीर में नमी बनी रहे और प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो।
- एक्सरसाइज और योग: घर में ही हल्की एक्सरसाइज और योग का अभ्यास करें, जो फेफड़ों को मजबूत बनाने में सहायक हो सकता है।

