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अरब देशों का स्विट्जरलैंड कहा जाता था लेबनान: शिया-सुन्नी और ईसाइयों से मिलकर बना; फिलिस्तीन की दोस्ती और इजराइल की दुश्मनी में कैसे बर्बाद हुआ

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कभी “अरब देशों का स्विट्जरलैंड” कहा जाने वाला लेबनान आज राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक बदहाली और सामाजिक विभाजन का शिकार हो चुका है। 20वीं सदी के मध्य तक यह देश आर्थिक समृद्धि, सांस्कृतिक विविधता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का प्रतीक था। लेबनान में शिया, सुन्नी और ईसाइयों की त्रिकोणीय शक्ति संतुलन के साथ एक समृद्ध और शांत समाज था। लेकिन फिलिस्तीन के प्रति दोस्ती और इजराइल की दुश्मनी ने इसे एक युद्धभूमि में तब्दील कर दिया।

लेबनान का सुनहरा दौर

लेबनान 1960 और 70 के दशक में एक प्रमुख व्यापारिक और वित्तीय केंद्र था। इसकी राजधानी बेयरुत को मध्य-पूर्व का पेरिस कहा जाता था, जहां दुनिया भर से लोग व्यापार, शिक्षा और पर्यटन के लिए आते थे। यहां की बैंकिंग प्रणाली बेहद मजबूत थी और यह देश अपने विविध समाज के लिए प्रसिद्ध था, जिसमें ईसाई, सुन्नी और शिया मुसलमानों के समुदाय मिलकर रहते थे।

फिलिस्तीन संघर्ष का प्रभाव

लेबनान की समस्याओं की शुरुआत 1948 में इजराइल के गठन और फिलिस्तीन संघर्ष से हुई। फिलिस्तीनी शरणार्थियों का बड़े पैमाने पर लेबनान में आगमन हुआ, जिससे देश के सामाजिक ढांचे पर दबाव पड़ा। लेबनान की सरकार ने फिलिस्तीनी मुक्ति संगठन (PLO) को अपने देश में संचालन की अनुमति दी, जिसके कारण लेबनान धीरे-धीरे इजराइल के साथ टकराव की ओर बढ़ने लगा। PLO ने लेबनान को अपने अड्डे के रूप में इस्तेमाल किया और यहां से इजराइल के खिलाफ हमले किए, जिससे इजराइल ने लेबनान पर कई बार आक्रमण किया।

गृहयुद्ध और राजनीतिक विभाजन

1975 में लेबनान में गृहयुद्ध शुरू हुआ, जिसमें शिया, सुन्नी और ईसाई गुट आपस में भिड़ गए। इस युद्ध ने देश की राजनीतिक स्थिरता को खत्म कर दिया। 15 वर्षों तक चले इस गृहयुद्ध में हजारों लोग मारे गए और देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से तबाह हो गई। इस दौरान, इजराइल और सीरिया ने भी लेबनान में हस्तक्षेप किया, जिससे हालात और जटिल हो गए। इजराइल ने दक्षिणी लेबनान पर कब्जा कर लिया और वहां की शिया आबादी में हिज़्बुल्लाह का उदय हुआ, जिसने इजराइल के खिलाफ संघर्ष छेड़ा।

हिज़्बुल्लाह और इजराइल का संघर्ष

लेबनान में इजराइल के खिलाफ संघर्ष में हिज़्बुल्लाह एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभरा। यह संगठन शिया समुदाय का समर्थन प्राप्त करता है और इजराइल के खिलाफ कड़े हमले करता रहा है। इजराइल और हिज़्बुल्लाह के बीच 2006 का युद्ध लेबनान की स्थिति को और खराब कर गया। इस संघर्ष ने देश को और भी अस्थिर कर दिया और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने लेबनान की सरकार पर दबाव बनाना शुरू किया।

आर्थिक संकट और वर्तमान स्थिति

लेबनान आज भारी आर्थिक संकट में है। भ्रष्टाचार, कुप्रबंधन और राजनैतिक अस्थिरता ने इसे गहरे कर्ज और गरीबी की ओर धकेल दिया है। 2019 में शुरू हुए विरोध प्रदर्शन और 2020 में बेयरुत के बंदरगाह में हुए भीषण विस्फोट ने स्थिति को और बदतर बना दिया। इसके साथ ही इजराइल के साथ जारी तनाव और हिज़्बुल्लाह का प्रभाव भी देश के विकास में बाधा बन रहा है।

लेबनान की बर्बादी के कारण

लेबनान की बर्बादी के मुख्य कारणों में आंतरिक सांप्रदायिक विभाजन, फिलिस्तीन के प्रति अत्यधिक समर्थन, इजराइल के साथ टकराव, और बाहरी हस्तक्षेप शामिल हैं। जहां एक ओर फिलिस्तीन के समर्थन ने लेबनान को अंतर्राष्ट्रीय संघर्ष का केंद्र बना दिया, वहीं इजराइल के साथ दुश्मनी ने इसे एक स्थायी युद्ध क्षेत्र में तब्दील कर दिया।

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