प्रसिद्ध भोजपुरी गायिका शारदा सिन्हा का हाल ही में निधन हो गया, जिससे उनके परिवार और प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई। शारदा सिन्हा का निधन मल्टीपल मायलोमा और सेप्टीसीमिया जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण हुआ। यह दोनों बीमारियां बहुत ही खतरनाक होती हैं, और इस खबर ने उनके चाहने वालों को हैरान कर दिया। तो आइए जानते हैं इन बीमारियों के बारे में, जो उनकी मृत्यु का कारण बनीं, और इसके प्रभाव पर डॉक्टरों की राय।
मल्टीपल मायलोमा: क्या है यह बीमारी?
मल्टीपल मायलोमा एक प्रकार का कैंसर है जो रक्त के श्वेत रक्त कोशिकाओं (प्लाज्मा कोशिकाओं) को प्रभावित करता है। यह कोशिकाएं शरीर में एंटीबॉडी का निर्माण करती हैं, जो संक्रमण से लड़ने में मदद करती हैं। जब ये कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं, तो वह मायलोमा के रूप में एक गंभीर स्थिति बन जाती हैं।
इस बीमारी में असामान्य कोशिकाएं हड्डियों में इकट्ठी हो जाती हैं, जिससे हड्डियों में दर्द, फ्रैक्चर और कमजोरी हो सकती है। इसके अलावा, यह किडनी की समस्या, रक्त में कैल्शियम का स्तर बढ़ने, और शरीर की अन्य प्रणालियों को भी प्रभावित कर सकता है। मल्टीपल मायलोमा का इलाज संभव है, लेकिन यह एक लंबा और कठिन उपचार प्रक्रिया है, जिसमें कीमोथेरेपी, स्टेम सेल ट्रांसप्लांट, और इम्यून थेरपी शामिल होती है।
सेप्टीसीमिया: क्या है यह संक्रमण?
सेप्टीसीमिया एक गंभीर और जीवन-धातक संक्रमण है, जो शरीर के विभिन्न अंगों में तेजी से फैलता है। यह तब होता है जब शरीर का इन्फेक्शन ब्लडस्ट्रीम में फैलकर सेप्टिक शॉक का कारण बनता है। इससे शरीर के अंगों की कार्यप्रणाली पर असर पड़ता है और अगर समय पर इलाज न किया जाए, तो यह मृत्यु का कारण बन सकता है।
सेप्टीसीमिया के लक्षणों में तेज बुखार, श्वसन संबंधी समस्याएं, शरीर में ऐंठन, कम रक्तचाप, और मानसिक भ्रम जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इस संक्रमण का इलाज एंटीबायोटिक्स से किया जाता है, लेकिन अगर यह संक्रमण ज्यादा फैल जाए तो इलाज और भी जटिल हो सकता है।
शारदा सिन्हा की बीमारी का प्रभाव
शारदा सिन्हा की मौत मल्टीपल मायलोमा और सेप्टीसीमिया के कारण हुई, जो दोनों ही खतरनाक और जटिल स्वास्थ्य समस्याएं हैं। मल्टीपल मायलोमा के कारण उनकी हड्डियों पर दबाव पड़ा और उनका शरीर कमजोर हुआ, जिससे सेप्टीसीमिया संक्रमण फैलने में मदद मिली। यह एक दुर्लभ और गंभीर स्थिति थी, जिसमें उनका शरीर इन दोनों बीमारियों से जूझते हुए अंततः हार गया।
डॉक्टरों का कहना: कैसे बचाव और उपचार संभव है
डॉक्टरों के अनुसार, मल्टीपल मायलोमा और सेप्टीसीमिया दोनों ही ऐसी स्थितियां हैं, जिन्हें समय पर पहचानकर सही उपचार से रोका जा सकता है। मल्टीपल मायलोमा के लिए रक्त परीक्षण और हड्डियों की जांच से जल्दी निदान किया जा सकता है। सेप्टीसीमिया का भी इलाज जल्दी शुरू करने से मरीज की जान बचाई जा सकती है। इन दोनों बीमारियों से बचाव के लिए नियमित चिकित्सा जांच, मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली, और संक्रमण से बचाव के उपाय आवश्यक हैं।

