श्रीलंका में कल राष्ट्रपति चुनाव होने जा रहे हैं और चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों के अनुसार, जन संघर्ष बल (JVP) के नेता और चीन समर्थक अनुरा कुमारा दिसानायके प्रमुख उम्मीदवारों में सबसे आगे हैं। उन्होंने अपनी चुनावी रैलियों और घोषणापत्र में स्पष्ट रूप से भारत के उद्योगपति गौतम अडानी के साथ हुए समझौते को रद्द करने का वादा किया है, जो श्रीलंका में बिजली परियोजनाओं और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से संबंधित है।
दिसानायके का रुख और चुनावी मुद्दे
अनुरा दिसानायके ने अपनी चुनावी मुहिम के दौरान भ्रष्टाचार, आर्थिक असमानता और विदेशी हस्तक्षेप के खिलाफ आवाज उठाई है। चीन के प्रति सकारात्मक रवैया रखते हुए उन्होंने अडानी प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय हित के खिलाफ बताया है और इसे रद्द करने की बात कही है। उनका कहना है कि देश की संपत्तियों और परियोजनाओं को सस्ती दरों पर विदेशी कंपनियों को नहीं बेचा जाना चाहिए।
चुनाव में अन्य प्रमुख मुद्दे
इस चुनाव में श्रीलंका की आर्थिक स्थिति, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी, तथा COVID-19 के बाद की आर्थिक बहाली मुख्य मुद्दे बने हुए हैं। अनुरा कुमारा दिसानायके का दावा है कि यदि वे सत्ता में आते हैं, तो वे आर्थिक पुनर्निर्माण और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाएंगे।
चीन और श्रीलंका के संबंध
चीन और श्रीलंका के बीच पिछले कुछ वर्षों में कूटनीतिक और आर्थिक संबंध मजबूत हुए हैं। चीन ने श्रीलंका को कई बुनियादी ढांचे और बंदरगाह परियोजनाओं के लिए धन मुहैया कराया है। दिसानायके का चीन समर्थक रुख श्रीलंका की विदेश नीति में बदलाव का संकेत दे सकता है, खासकर भारत और पश्चिमी देशों के साथ संबंधों के संदर्भ में।
श्रीलंका में राष्ट्रपति चुनाव का परिणाम देश के आर्थिक और राजनीतिक भविष्य को गहराई से प्रभावित कर सकता है

