श्रीलंका की नई प्रधानमंत्री हरिनी अमरसूर्या का नाम अब सिर्फ अपने देश तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका एक खास रिश्ता भारत से भी जुड़ा हुआ है। हाल ही में प्रधानमंत्री के पद की शपथ लेने वाली हरिनी अमरसूर्या ने अपनी उच्च शिक्षा भारत की राजधानी दिल्ली में पूरी की थी।
हरिनी ने दिल्ली के प्रतिष्ठित दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से अपनी पढ़ाई की, जहाँ से उन्होंने समाजशास्त्र में मास्टर्स डिग्री प्राप्त की। उनके इस शैक्षणिक सफर ने न केवल उन्हें एक बेहतर दृष्टिकोण दिया, बल्कि भारतीय संस्कृति और समाज को भी करीब से समझने का मौका दिया।
भारत से पुराना जुड़ाव
हरिनी अमरसूर्या का भारत से यह जुड़ाव सिर्फ शैक्षणिक स्तर तक सीमित नहीं है। वह अक्सर भारतीय समाज, राजनीति और सांस्कृतिक गतिविधियों पर अपने विचार साझा करती रही हैं। दिल्ली में बिताए अपने सालों के दौरान उन्होंने भारतीय छात्रों और समाजशास्त्र के विद्वानों के साथ गहरी बातचीत की, जो उनके राजनीतिक दृष्टिकोण और नेतृत्व के विकास में सहायक साबित हुआ।
श्रीलंका की राजनीति में नया चेहरा
हरिनी अमरसूर्या को एक उदार, प्रगतिशील और संवेदनशील नेता के रूप में देखा जाता है। उनके नेतृत्व में श्रीलंका को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। उनका भारतीय शिक्षा और दृष्टिकोण उनकी राजनीति में भी झलकता है, जहां वे दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने पर जोर देती रही हैं।
भारत और श्रीलंका के रिश्तों पर क्या होगा असर?
हरिनी अमरसूर्या का प्रधानमंत्री बनना भारत और श्रीलंका के बीच रिश्तों के लिए एक सकारात्मक संकेत हो सकता है। उनके भारतीय शिक्षा और अनुभव के चलते दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों में और प्रगाढ़ता आ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि हरिनी के कार्यकाल के दौरान द्विपक्षीय सहयोग के नए रास्ते खुल सकते हैं।
उनके भारत के साथ व्यक्तिगत जुड़ाव को देखते हुए यह संभावना जताई जा रही है कि वे दोनों देशों के बीच व्यापार, पर्यटन, और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए नई नीतियों पर जोर देंगी।
अब सभी की नजरें हरिनी अमरसूर्या पर हैं कि वह अपने कार्यकाल में कैसे श्रीलंका की राजनीतिक स्थिरता को मजबूत करती हैं और भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाती हैं।

