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लेबनान में घुसा इजरायल तो होगी खतरनाक जंग, मौत तक लड़ने के लिए तैयार हैं हिज़्बुल्लाह के लड़ाके, एक्सपर्ट्स दे रहे चेतावनी

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मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, और हाल ही में लेबनान-इजरायल सीमा पर स्थिति और भी गंभीर हो गई है। हिज़्बुल्लाह के लड़ाके इजरायल के खिलाफ मौत तक लड़ने के लिए तैयार हैं, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि अगर इजरायल लेबनान में घुसता है, तो यह एक खतरनाक और विनाशकारी युद्ध में बदल सकता है। क्षेत्र के जानकार और सैन्य विशेषज्ञ इस संभावित संघर्ष को लेकर गंभीर चेतावनी दे रहे हैं।

हिज़्बुल्लाह के लड़ाके तैयार मौत तक लड़ने के लिए

लेबनान में सक्रिय शिया आतंकी संगठन हिज़्बुल्लाह ने पहले ही ऐलान कर दिया है कि उसके लड़ाके इजरायल के किसी भी हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। संगठन के लड़ाकों ने कई बार अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया है और इजरायल को चुनौती दी है कि अगर वह लेबनान में घुसने की कोशिश करता है, तो उसे भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। हिज़्बुल्लाह के नेता इसे “मौत तक लड़ाई” के रूप में देख रहे हैं और अपने लड़ाकों को किसी भी तरह के संघर्ष के लिए तैयार कर रहे हैं।

इजरायल के संभावित हमले की तैयारी

इजरायल और हिज़्बुल्लाह के बीच पिछले कुछ समय से तनाव बढ़ा हुआ है। इजरायल ने हाल ही में अपनी सीमा सुरक्षा को और कड़ा किया है और संभावित खतरों के खिलाफ तैयारी कर रहा है। हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर हमले की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि इजरायल अपनी सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए किसी भी खतरे का जवाब देने के लिए तैयार रहता है। अगर इजरायल लेबनान की सीमा में प्रवेश करता है, तो यह संघर्ष और भी विकराल रूप ले सकता है।

एक्सपर्ट्स की चेतावनी: विनाशकारी हो सकता है युद्ध

सैन्य और राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इजरायल और हिज़्बुल्लाह के बीच युद्ध होता है, तो यह सिर्फ लेबनान और इजरायल तक सीमित नहीं रहेगा। इससे पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता फैल सकती है और अन्य क्षेत्रीय ताकतें भी इसमें शामिल हो सकती हैं।

1. क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ेगी:

लेबनान और इजरायल के बीच जंग पूरे मध्य पूर्व को प्रभावित कर सकती है। सीरिया, ईरान और अन्य क्षेत्रीय शक्तियां इस संघर्ष में अपनी भूमिका निभा सकती हैं, जिससे युद्ध और भी बड़े पैमाने पर फैल सकता है।

2. मानवीय संकट:

विशेषज्ञों का मानना है कि इस संघर्ष के परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर मानवीय संकट पैदा हो सकता है। हिज़्बुल्लाह के मुख्यालय लेबनान के भीड़भाड़ वाले इलाकों में स्थित हैं, और इजरायल के हमलों से आम नागरिकों को भारी नुकसान हो सकता है। इसके अलावा, बड़े पैमाने पर शरणार्थियों का संकट भी उत्पन्न हो सकता है, जैसा कि पहले हो चुका है।

3. ईरान की भूमिका:

ईरान हिज़्बुल्लाह का सबसे बड़ा समर्थक है और इस संगठन को वित्तीय और सैन्य सहायता प्रदान करता है। अगर इजरायल और हिज़्बुल्लाह के बीच युद्ध छिड़ता है, तो ईरान की भूमिका निर्णायक हो सकती है। ईरान के समर्थन से हिज़्बुल्लाह की ताकत और भी बढ़ सकती है, जिससे इजरायल को कड़ी टक्कर मिल सकती है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता

अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस बढ़ते तनाव को लेकर चिंतित है। संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका जैसी प्रमुख शक्तियां दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रही हैं। हालाँकि, इजरायल अपनी सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहता और हिज़्बुल्लाह भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। इस स्थिति में अंतरराष्ट्रीय कूटनीति कितनी प्रभावी हो सकती है, यह देखना बाकी है।

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