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बांग्लादेश में 2 हिंदू युवक राजद्रोह के मामले में गिरफ्तार, आजादी स्तंभ पर भगवा ध्वज फहराने का आरोप

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बांग्लादेश में हाल ही में हुए एक विवादास्पद घटना के तहत 2 हिंदू युवकों को गिरफ्तार किया गया है। इन पर आरोप है कि उन्होंने ढाका के एक प्रतिष्ठित स्वतंत्रता स्मारक ‘मुक्ति स्तंभ’ (जिसे स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक माना जाता है) पर भगवा ध्वज फहराया, जो स्थानीय कानूनों के अनुसार राजद्रोह की श्रेणी में आता है। पुलिस के अनुसार, इस मामले में कुल 19 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

यह घटना बांग्लादेश की राजधानी ढाका के प्रसिद्ध मुक्ति स्तंभ में हुई। बांग्लादेश की आजादी के प्रतीक माने जाने वाले इस स्मारक पर भगवा ध्वज लगाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिससे व्यापक नाराजगी फैली। कुछ लोगों का मानना है कि इस ध्वज फहराने की घटना में बांग्लादेश की संप्रभुता और आजादी का अपमान हुआ है।

पुलिस का कहना है कि इन युवकों पर बांग्लादेश की संप्रभुता को चोट पहुंचाने और सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने के आरोप में कार्रवाई की जा रही है। बांग्लादेश में राजद्रोह और सांप्रदायिक तनाव फैलाने को गंभीर अपराध माना जाता है। पुलिस ने बताया कि भगवा ध्वज एक धार्मिक प्रतीक के रूप में देखा जाता है और इस तरह के कृत्य को देश में सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने की कोशिश माना जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए इन युवकों के खिलाफ राजद्रोह और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से जुड़े कानूनों के तहत मामला दर्ज किया गया है।

इस घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उन लोगों की पहचान की जो इस गतिविधि में शामिल थे। अब तक 19 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया जा चुका है और अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि इन सभी आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।

इस घटना के बाद बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय में चिंता की लहर है। स्थानीय समुदाय का कहना है कि वे हमेशा से ही शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में विश्वास रखते हैं, लेकिन इस घटना के कारण उनके प्रति संदेह का माहौल बन रहा है। कई हिंदू संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा की मांग की है।

बांग्लादेश की सरकार ने इस घटना पर तुरंत संज्ञान लिया और नागरिकों से शांति बनाए रखने की अपील की है। सरकार ने कहा कि देश में किसी भी धार्मिक समुदाय के खिलाफ भेदभाव या हिंसा की अनुमति नहीं दी जाएगी और सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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