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फिल्म और टीवी शोज की राइटिंग में बड़ा अंतर: स्क्रीनप्ले राइटिंग में सलमान खान की दिलचस्पी, संजय दत्त ने कहानी सुनकर बहाए आंसू

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बॉलीवुड में फिल्मों और टीवी शोज की राइटिंग को लेकर हमेशा से एक बड़ा अंतर रहा है। फिल्में बड़े पर्दे पर चलती हैं, जहाँ सीमित समय में कहानी को प्रस्तुत करना होता है, वहीं टीवी शोज में लंबे समय तक किरदारों और घटनाओं को विस्तार देने की गुंजाइश होती है। फिल्म स्क्रीनप्ले में कहानी को संक्षिप्त और प्रभावी बनाना होता है, जबकि टीवी शोज में हर एपिसोड को एक नई गति दी जाती है।

सलमान खान की स्क्रीनप्ले राइटिंग में दिलचस्पी

सलमान खान सिर्फ अभिनय में ही नहीं बल्कि फिल्मों की कहानी और स्क्रीनप्ले में भी गहरी रुचि रखते हैं। वह अक्सर अपने सुझाव देते हैं ताकि कहानी दर्शकों को और भी अधिक प्रभावी लगे। सलमान अपने फिल्मों के किरदारों में खुद को ढालते हैं और उनके स्क्रीनप्ले को बेहतर बनाने के लिए छोटे-बड़े बदलावों का सुझाव भी देते हैं। जैसे कि उनकी फिल्म “बजरंगी भाईजान” में कई सीन को उनकी सलाह के बाद जोड़ा गया, जिससे फिल्म की भावनात्मकता और अधिक प्रभावी हो गई।

संजय दत्त की भावनात्मक प्रतिक्रिया

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता संजय दत्त को भी कहानियों से गहरा लगाव है। एक घटना के अनुसार, जब एक फिल्म की कहानी संजय दत्त को सुनाई गई, तो वह इतनी भावनात्मक और मार्मिक थी कि संजय दत्त खुद को रोक नहीं पाए और उनकी आँखों में आंसू आ गए। यह घटना दिखाती है कि एक सशक्त कहानी कैसे किसी अनुभवी अभिनेता को भी गहराई तक छू सकती है।

फिल्म और टीवी राइटिंग में मूलभूत अंतर

  1. लंबाई और फॉर्मेट: फिल्मों में कहानी को लगभग 2-3 घंटे में संक्षिप्त करना पड़ता है, जबकि टीवी शोज में हफ्तों और महीनों तक चलने की गुंजाइश होती है।
  2. किरदारों का विकास: फिल्मों में किरदारों का विकास तेजी से होता है, जिससे उन्हें दर्शक तुरंत समझ सकें। टीवी शोज में किरदारों के विकास को धीरे-धीरे विस्तार दिया जाता है।
  3. प्लॉट ट्विस्ट्स और क्लिफहैंगर्स: टीवी शोज में प्लॉट ट्विस्ट्स और क्लिफहैंगर्स होते हैं, जो दर्शकों को अगले एपिसोड के लिए उत्सुक बनाए रखते हैं, जबकि फिल्मों में प्लॉट ट्विस्ट्स का इस्तेमाल सीमित रूप से किया जाता है।
  4. दर्शकों से जुड़ाव: टीवी शोज में हर एपिसोड के बाद दर्शकों से जुड़ने का मौका होता है, जबकि फिल्मों में दर्शकों को एक ही बार में पूरी कहानी से जोड़ना होता है।

सलमान और संजय जैसे सितारों का योगदान

बॉलीवुड में सलमान खान और संजय दत्त जैसे सितारे अपनी फिल्मों में कहानियों को लेकर बहुत संजीदा रहते हैं। सलमान के सुझावों से उनकी फिल्मों में गहराई आ जाती है, वहीं संजय दत्त की भावनात्मकता एक कहानी को जीवंत बना देती है। यह दर्शाता है कि कलाकार न केवल पर्दे पर, बल्कि पर्दे के पीछे भी कहानी की आत्मा को जीवंत करने में योगदान देते हैं।

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