फिल्मों में एक्टिंग केवल अच्छी स्क्रिप्ट और उम्दा डायरेक्शन तक सीमित नहीं होती, बल्कि एक्टर की डायलॉग डिलीवरी और भाषा पर पकड़ भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। कई बार, फिल्म में किरदार को सजीव बनाने के लिए एक्टर्स को एक खास बोली, लहजा, या भाषा सीखनी पड़ती है। ऐसा ही कुछ हुआ जब आमिर खान को दंगल के लिए हरियाणवी सीखनी पड़ी, और जॉन अब्राहम को अपने एक इमोशनल सीन में सही ढंग से डायलॉग बोलने के लिए संघर्ष करना पड़ा।
आमिर खान ने दंगल में हरियाणवी बोली सीखी
दंगल फिल्म में हरियाणा के पहलवान महावीर फोगाट की भूमिका निभा रहे आमिर खान के लिए हरियाणवी लहजे में डायलॉग बोलना एक बड़ी चुनौती थी। हालांकि आमिर को उनके परफेक्शन के लिए जाना जाता है, लेकिन दंगल में हरियाणवी सीखने में उन्हें काफी वक्त और मेहनत लगी। उन्होंने फिल्म के किरदार को जीवंत करने के लिए अपनी भाषा और बोलचाल पर खूब ध्यान दिया। इसके लिए उन्हें कई महीनों तक हरियाणवी सिखाई गई और उन्होंने हरियाणवी में महारत हासिल करने के लिए ट्रेनिंग ली। इस प्रक्रिया में आमिर को हर शब्द और वाक्य का उच्चारण परफेक्ट तरीके से सीखना पड़ा ताकि वे पूरी तरह से अपने किरदार में ढल सकें।
दंगल के डायरेक्टर नितेश तिवारी ने बताया कि आमिर को हरियाणवी सीखने में बहुत मेहनत करनी पड़ी। वे अपने किरदार के हर पहलू को समझने के लिए गाँव के स्थानीय लोगों के साथ समय बिताते थे, उनके बोलने के तरीके और हाव-भाव को बारीकी से समझते थे ताकि फिल्म में वे एक असली हरियाणवी पहलवान की तरह लगें।
जॉन अब्राहम डायलॉग बोलते समय हुए भावुक
जॉन अब्राहम को भी अपनी फिल्मों में कई बार इमोशनल और कठिन डायलॉग्स को सही तरीके से बोलने में परेशानी होती है। एक इमोशनल सीन में, जब उन्हें एक गहरे भावनात्मक डायलॉग को बोलना था, तो वे इतनी भावुकता से भर गए कि डायलॉग बोलते-बोलते उनकी आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने बताया कि किरदार के साथ इतनी गहरी जुड़ाव और सीन में समर्पण ही एक्टर को उसके असल किरदार में ढालता है।
इस अनुभव ने जॉन को महसूस कराया कि केवल स्क्रिप्ट में लिखे गए शब्दों को बोलना काफी नहीं होता; उन्हें उस भावना के साथ कहना होता है जो किरदार महसूस कर रहा है।
क्यों जरूरी है सही लहजे में बोलना?
फिल्मों में सही लहजे और डायलॉग डिलीवरी से किरदार को असल रूप में पेश करने में मदद मिलती है। इससे दर्शकों के साथ कनेक्ट करना आसान हो जाता है और फिल्म में यथार्थ का अनुभव होता है। सही उच्चारण और सही अंदाज से बोला गया संवाद दर्शकों पर गहरा असर डालता है और फिल्म को यादगार बनाता है।
बॉलीवुड के अन्य स्टार्स भी सीख चुके हैं अलग-अलग बोलियां
- रणवीर सिंह: गली बॉय में रणवीर ने मुंबई के लोकल लहजे में बोली सीखने के लिए कई महीनों तक तैयारी की ताकि वे असली स्ट्रीट रैपर की तरह लग सकें।
- प्रियंका चोपड़ा: मैरी कॉम में प्रियंका ने मणिपुरी लहजे में बात करना सीखा ताकि वे नॉर्थ-ईस्ट के किरदार को सही ढंग से निभा सकें।
- विद्या बालन: इश्किया और डेढ़ इश्किया जैसी फिल्मों में विद्या ने उत्तर प्रदेश की बोली सीखने में काफी मेहनत की।

