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भारत ने BRICS में तुर्किये की एंट्री पर लगाई रोक: पाकिस्तान के करीब होने की वजह से सदस्यता देने से किया इनकार

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BRICS में सदस्यता विस्तार को लेकर हुई बैठक में भारत ने तुर्किये (टर्की) की एंट्री पर आपत्ति जताई है। माना जा रहा है कि भारत का यह फैसला तुर्किये और पाकिस्तान के करीबी संबंधों के कारण आया है। सूत्रों के अनुसार, भारत ने स्पष्ट किया कि तुर्किये का पाकिस्तान के साथ करीबी संबंध BRICS के मूल उद्देश्यों के खिलाफ जा सकता है और इससे सदस्य देशों के बीच स्थिरता पर असर पड़ सकता है।

तुर्किये का BRICS में शामिल होने की महत्वाकांक्षा

तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन ने पिछले कुछ समय से BRICS में सदस्यता पाने की इच्छा जताई थी। इससे पहले 2023 में BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान भी तुर्किये ने BRICS में शामिल होने की इच्छा जाहिर की थी। तुर्किये की BRICS में एंट्री को लेकर किए गए इस प्रयास को पश्चिमी देशों से हटकर विकासशील देशों के साथ संबंध मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा था।

भारत का तर्क: तुर्किये और पाकिस्तान के संबंध

भारत का मानना है कि तुर्किये का BRICS में शामिल होना संगठन के उद्देश्यों को बाधित कर सकता है। पाकिस्तान के साथ तुर्किये के मजबूत रिश्तों के चलते भारत को आशंका है कि यह संगठन की संतुलन स्थिति को प्रभावित कर सकता है। भारत के अधिकारियों का मानना है कि तुर्किये के आने से BRICS की आंतरिक संरचना और सदस्यों के बीच के भरोसे पर असर पड़ सकता है, जो विकासशील देशों के हितों के लिए हानिकारक हो सकता है।

तुर्किये की प्रतिक्रिया

तुर्किये की ओर से अब तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन BRICS में प्रवेश पाने के तुर्किये के लगातार प्रयास यह दिखाते हैं कि वह इस संगठन का हिस्सा बनने के लिए उत्सुक है।

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